Kalari Ras
कालारि रस
मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation) – शुद्ध पारद 9 माशा, शुद्ध गंधक 15 माशा, शुद्ध बच्छनाग 9 माशा, छोटी पीपल 30 माशा, लौंग 2 माशा, धतूरे के बीज 9 माशा, सुहागे की खील 9 माशा, जायफल 15 माशा, काली मिर्च 15 माशा और अकरकरा 9 माशा लें। प्रथम पारद-गन्धक की कज्जली कर उसमें अन्य द्रव्यों का सूक्ष्म कपड़छन चूर्ण मिला, करीर, अदरक-स्वरस और नींबू–इन प्रत्येक के रस में 3-3 दिन मर्दन करके 2-2 रत्ती की गोलियाँ बना लें। यो.चि.
मात्रा और अनुपान (Dose and Anupan)– 1- 1 गोली अदरक का रस, तुलसी का रस 7 से 21 लौंग का अर्धावशेष क्वाथ इनमें से किसी एक अनुपान से वात ज्वर, कफ ज्वर और कफवाताधिक सन्निपात में दें। सन्निपात ज्वर की प्रथमावस्था में तगरादि क्वाथ के साथ या 7 लौंग, 3 माशा ब्राह्मी की ताजी पत्ती, 3 माशा जटामांसी और तीन माशा शंखाहुली के क्वाथ के अनुपान से दें। विषम ज्वर में जायफल चूर्ण 1 माशा के साथ देकर ऊपर से दूध पिला दें। अथवा नीम के पत्तों के स्वरस 1 की भावना दी हुई गोदन्ती भस्म के साथ दे सकते हैं।
गुण और उपयोग (Uses and Benefits) :-
- यह रसायन साधारण ज्वर, सन्निपात ज्वर और विषम ज्वर में भी दिया जाता है।
- विषम ज्वर में तो कुनैन की जगह इसका प्रयोग करना चाहिए।
- सन्निपात में उत्पन्न श्वास-कास-हिक्का प्रलाप आदि शमन करने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है।
- वात-कफ का शमन करते हुए ज्वर के उपद्रवों को भी यह दूर करता है।
- वात और कफ प्रधान सन्निपात में इस रस के प्रयोग से दोषों के बढ़े हुए प्रकोप का शमन होकर उपद्रव शान्त हो जाते हैं एवं पाचन होकर ज्वर ठीक हो जाता है।
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