Mahabhrigraj Tel
महाभृंगराज तैल
गुण और उपयोग (Uses and Benefits):
- इस तैल को सिर में लगाने से बालों का असमय में झड़ना और सफेद होना ये दोनों विकार नष्ट होते हैं।
- इसके अतिरिक्त शिरो रोग, मन्यास्तम्भ (Cervical Pain), गल-ग्रह, कान तथा आँख के रोगों में नस्य लेने तथा मालिश करने से उत्तम लाभ करता है।
- यह बालों को काले, घुँघराले और चिकने बनाता तथा बालों को खूब उगाता तथा बढ़ाता हैं।
- बालों का गिर जाना या न उगना–इन दोनों रोगों को भी यह नष्ट करता है।
मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation): – तिल तेल (मूर्च्छित) 28 तोला, भृंगराज का स्वरस या क्वाथ 572 तोला लें। पश्चात् मंजीठ, पञ्चकाष्ठ, लोध, चन्दन लाल, गैरिक, खरेंटी का पंचांग, हल्दी, दारुहल्दी, नागकेशर, प्रियंगु, मुलेठी, प्रपोण्डरीक (कमल-फूल), अनन्तमूल–प्रत्येक 4-4 तोला लेकर, कूटकर दुग्ध से पीसकर कल्क बना लें। फिर एक कड़ाही में तिल तेल भृंगराज-स्वरस तथा कल्क को डालकर तैल-पाक-विधि से पकावें। तैल सिद्ध हो जाने पर, छानकर पात्र में भरकर रख लें।
| –भै. र.
वक्तव्य: द्रव पदार्थों को द्रवद्वेगुण्य परिभाषा के अनुसार द्विगुण लिया गया है। फिर भी इस तैल में कल्क का परिमाण अधिक है, अतः तैल से चतुर्थीश कल्क को कल्क रूप में मिलावें तथा शेष कल्क को अष्टगुण जल में पकाकर, चतुर्थांश जल शेष रहने पर छानकर, इस क्वाथ को तैल में डालकर इससे भी पाक कर लें। ऐसा करनें से बनाने में सुविधा रहती है एवं उत्तम गुणयुक्त भी बनता है।
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