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    Post Views: 161 धात्र्यरिष्ट गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : इसके सेवन से पाण्डु, कामला, हृद्रोग, वातरक्त, विषमज्वर, खाँसी, हिचकी, अरुचि और श्वास रोग नष्ट होते हैं। पाण्डु और कामला रोग में जब शरीर में रकतकणों की कमी होकर जल भाग की वृद्धि विशेष हो जाती है, तब शरीर पीताभ दिखने लगता है, भूख कम…

  • Shrikhandasava

    Post Views: 171 श्रीखंडासव गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : इसके सेवन से मद्यजनित रोग यथा–पानात्यय, पानविभ्रम, पानाजीर्ण आदि रोग दूर होते हैं। पैत्तिक (पित्तजन्य) रोगों में इसका विशेष उपयोग किया जाता है। रक्तपित्त, प्यास कीं अधिकता, बाह्यदाह और अन्तर्दाह, रक्तदोष, मूत्रकृच्छू, मूत्राघात, शुक्रदोष आदि विकारों में भी यह उत्तम लाभदायक है। मात्रा और अनुपान …

  • Sleshamkalanal Ras

    Post Views: 7 श्लेष्मकालानल रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation): –  शुद्ध पारद 1 तोला, शुद्ध गन्धक 1 तोला, शुद्ध विष 4 तोला, त्रिकटु मिलित 8 तोला, हरड़, बहेड़ा, आँवला, पोहकर मूल, अजमोद, अजगन्धिका (वनतुलसी), वायविडंग, कायफल, चव्य, सेन्धा नमक, कालानमक, सामुद्र नमक, साम्भर नमक, मनिहरी नमक, लौंग, निशोथ, दन्तीमूल–ये…

  • Narikelasava

    Post Views: 161 नारिकेलासव गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : यह आसव पौष्टिक, बल-वीर्य बढ़ाने वाला और बाजीकरण है। इसके सेवन से कामशक्ति की वृद्धि होती है। धानुक्षीणता , छोटी आयु में अप्राकृतिक ढंग से शुक्र का नाश करने या अधिक स्वप्न दोष अथवा और भी किसी कारण से वीर्य पतला हो गया हो, वीर्य-वाहिनी…

  • Kaphketu Ras

    Post Views: 27 कफकेतु रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –   शंख भस्म, पीपल, सुहागे की खील, शुद्ध वत्सनाभ–प्रत्येक ।-। तोला लेकर एकत्र कर खरल करके, अदरक रस की तीन भावना देकर, 1-1 रत्ती की गोली बना, सुखाकर रख लें। मात्रा और अनुपान  (Dose and Anupan)–  1 से 2 गोली चार-चार…

  • Bharangi Gud

    Post Views: 603 भार्गी गुड़ गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसके सेवन से दारुण श्वास तथा सब प्रकार के कास नष्ट होते हैं। यह स्वर को साफ करता और अग्नि (जठराग्नि) को प्रदीप्त करता है। पुराने कास-श्वास वाले रोगी के लिए यह अमृत के समान फायदा करता है, क्योंकि इसका प्रभाव वातवाहिनी तथा…