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  • Tuvrak Tel – Chalmogra oil

    Post Views: 245 तुबरक तैल ( चालमोंगरा तैल ) गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : सबेरे-शाम दिन में दो बार यह तैल पाँच बूँद की मात्रा से आरम्भ करें और प्रति चौथे दिन पाँच बूँद की मात्रा बढ़ाकर 4 तोला तक गाय के ताजे मक्खन या दूध की मलाई में मिलाकर दें। रोगी जितनी मात्रा…

  • Chandan Bala Lakshadi Tel

    Post Views: 119 चन्दन-बला-लाक्षादि तैल गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : यह तेल खाँसी, श्वास, क्षय, छर्दि, रक्तप्रदर, रक्तपित्त, कफ रोग, दाह, कण्डू, विस्फोटक, शिरोरोग, नेत्रदाह, शरीर का दाह, सूजन, कामला, पाण्डु रोग और ज्वर का नाश करता है। इसके अतिरिक्त दाह, पाण्डु, छाती, कमर, हाथ-पाँव का जकड़ जाना, इनमें भी लाभदायक है। सूखी…

  • Pashupat Ras

    Post Views: 17 पाशुपत रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारा 1 तोला, शुद्ध गन्धक 2 तोला, तीक्ष्ण लोहभस्म 3 तोला और शुद्ध बच्छनाग 6 तोला लें। प्रथम पारा-गंधक की कज्जली बना, फिर अन्य औषधें मिला, सबको एक दिन चित्रकमूल के क्वाथ में घोंटें। फ़िर सोंठ, पीपल, मिर्च…

  • Madhumalini Basant

    Post Views: 15 मधुमालिनी बसंत मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध हिंगुल 8 तोला और खर्पर भस्म (अभाव में यशद भस्म) 8 तोला लेकर दोनों को खरल में डालकर बड़हर-रस की 7 भावना देकर छोटे-छोटे गोले बनाकर छाया में सुखा लें। पश्चात्‌ बेरी की लकड़ी के कोयल़ों की अग्नि…

  • Agnisandipan Ras

    Post Views: 33 अग्निसन्दीपन रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  पीपल, पीपलामूल, चव्य, चित्रक, सोंठ, काली मिर्च, पाँचों नमक, यवक्षार, सज्जीक्षार सुहाँगै की खील, सफेद जीरा, काला जीरा, अजवायन, बच सौंफ, भुनी हींग, चीते की छाल जायफल, कूठ, जावित्री, दालचीनी, तेजपात, इलायची छोटी, इमली का क्षार, अपामार्ग (चिरचिरे)…