Hardyearnava Ras
हृदयार्णव रस
मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation): – शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक और ताम्र भस्म 1-1 तोला लेकर तीनों को एकत्र कज्जली बना, 1-1 दिन त्रिफला और मकोय के रस में मर्दन कर, चना-प्रमाण की (एक-एक रत्ती) गोलियाँ बना, सुखा कर रख लें।
मात्रा और अनुपान (Dose and Anupan) :- 1-1 गोली सुबह-शाम। मकोय के फल 1 तोला और त्रिफला चूर्ण 1 तोला को 20 तोला जल में पकावें। पाँच तोला जल शेष रहने पर मल कर छान लें, बाद में इस क्वाथ के अनुपान से दें।
गुण और उपयोग (Uses and Benefits) :-
- इस रसायन का प्रभाव हृदय-रोग पर बहुत होता है।
- हृदय की कमजोरी, हृदय की अधिक धड़कन, हृदय-दर्द आदि रोग अच्छे हो जाते हैं।
- इस रसायन के सेवन से हृदय की गति नियमित हो जाती तथा हृदय सबल हो जाता है।
- हृत्पिण्ड में रोग होने से छाती में दर्द और हृदय सर्वदा धक-धक करता रहता है। यद्यपि छाती में अन्य बीमारी या चोट के कारण भी दर्द उत्पन्न हो जाता है, किन्तु उसके लक्षण भिन्न होते हैं। इसमें थोड़ा-सा परिश्रम करने से ही हृदय की धड़कन बढ़ जाना, मन चंचल, मृत्यु का भय और मूर्च्छा होने के लक्षण, निद्रा की कमी, पसली और छाती में दर्द, नाड़ी की गति तेज होना आदि लक्षण होते हैं। इसमें हृदयार्णव रस का उपयोग करने से बहुत लाभ होता है। पित्तजनित हद्रोगों में इसका प्रयोग मोती पिष्टी या प्रवाल पिष्टी आदि सौम्य औषधियों के साथ मिलाकर करना चाहिए, क्योंकि अकेले प्रयोग करने से इसमें पड़ी ताम्र भस्म की उग्रता के कारण पित्त की वृद्धि होकर लाभ के बदले हानि की सम्भावना ही अधिक है। अनुपान में भी आंवल-मुरब्बा, सेब का मुरब्बा आदि देना लाभदायक है।
- अधिक व्यायाम (कसरत), भय, शोक, अत्यन्त गर्मी आदि के कारणों से भी हृदय दूषित हो जाता है। हृदय की गति बन्द होने से तत्काल मृत्यु हो जाती है जिस को ‘हार्टफेल’ कहते हैं। कभी-कभी हदय में इतने जोर का दर्द उठता है कि रोगी बेचैन हो जाता हैं। यदि यह शूल कुछ और बढ़ा तो रोगी की मृत्यु हो जाती है। ऐसी भयंकर परिस्थिति में भी मृगशृंग भस्म के साथ हृदयार्णव रस देने से अच्छा लाभ होता है।
- हृदयरोगी को विश्राम की अधिक आवश्यकता रहती है, अतः परिश्रम बिलकुल बन्द कर देना चाहिए। यदि रोगी अधिक दुर्बल हो, तो ज्यादा चलने-फिरने न दें, अन्यथा हृदय की कमजोरी से रोगी की तुरन्त मृत्यु हो सकती है।
- हृदय की कमजोरी में मकरध्वज, मुक्ता पिष्टी, सोना भस्म आदि ताकत पहुँचाने वाली दवाओं का भी सेवन करना श्रेष्ठ है।
This content is for informational purposes only. Always consult a certified medical professional before using any medicines.
Book Your Online Consultation