Anandbherav Ras ( Cough )
आनन्दभैरव रस ( कास )
मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation) – शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक, शुद्ध हिंगुल, शुद्ध विष, सोंठ, काली मिर्च, पीपल, शुद्ध टंकण, पीपल-प्रत्येक द्रव्य 4-4 भाग लेकर प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बनावे, फिर उस कज्जली को भाँगरा-स्वरस की भावना देकर दृढ़ मर्दन करें, पश्चात् अन्य चूर्ण करने योग्य रव्यों का सूक्ष्म कपड़छन चूर्ण करके उपरोक्त कज्जली में मिलावें और बिजौरा नींबू के रस की भावना देकर दृढ़ मर्दन करें। गोली बनने योग्य. होने पर ।-। रत्ती की गोली बना सुखा कर सुरक्षित रख लें। र. ण. सु वक्तव्य . कुछ लोग सिर्फ व्योष में ही पीपल लेते हैं, आगे ‘टंकणं मगधासमम्’ से शुद्ध टंकण पीपल के बराबर लेते हैं। किन्तु “व्योष” शब्द से पृथक् ‘मगधा’ शब्द का उल्लेख पीपल को दो बार लेने का द्योतक है। अतः दो बार ही पीपल लेना चाहिये। र० रा० सुन्दर में इसका मूल पाठ नीचे लिखे अनुसार है।
यथा पारदं गन्धकं चैव भृंगराजेन मर्दयेत्। हिंगुलं च विषं व्योषं टंकणं मगधासमम्। मातुलुंगरसैमर्दध रसमानन्दभैरचम्॥
मात्रा और अनुपान (Dose and Anupan)– १ से 2 गोली तक अदरक का रस, पान का रस और मधु के साथ, या कुटज (कुड़ा) की छाल के क्वाथ या अनार के शर्बत अथवा साधारण जल से दें।
गुण और उपयोग (Uses and Benefits) :-
- इसके सेवन से खाँसी, श्वास, अतिसार, ग्रहणी, सन्निपात, अपस्मार, वातरोग, प्रमेह, अजीर्ण और अग्निमान्द्य रोग नष्ट होते हैं।