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    Post Views: 246 अष्टाङ्गावलेह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसका उपयोग कफजनित रोगों में विशेष किया जाता है। जैसे-कफज्वर में खाँसी, श्वास अधिक होने पर या कफ छाती में बैठ गया हो, किन्तु निकलता न हो तो उस हालत में भी कफ निकालने के लिए इसे देते हैं। न्यूमोनिया आदि रोगों में भी कफ…

  • Maha Gandhak Ras

    Post Views: 14 महागंधक रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारा और गन्धक दोनों समान भाग लेकर कञ्जली बना, उसे मन्दाग्नि पर पिघला, पर्पटी बना लें, फिर उसमें जायफल, जावित्री, लौंग, नीम के पत्तों का चूर्ण 1-1 तोला मिलाकर सबको पानी की सहायता से घोंटकर पिण्डाकार टिकिया बना…

  • Laxmivilas Ras ( Kasa )

    Post Views: 14 लक्ष्मीविलास रस ( रसेन्द्र-कास ) मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारद 4 तोला, शुद्ध हरिताल 4 तोला, खर्पर भस्म 2 तोला, बंग भस्म, ताम्र भस्म, अभ्रक भस्म, कान्त लौह भस्म, कांस्य भस्म, शुद्ध गन्धक-ये प्रत्येक द्रव्य 4-4 तोला लेकर प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बनावे, पश्चात्‌…

  • Shothkalanal Ras

    Post Views: 10 शोथकालानल रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation): –  चित्रक मूल की छाल, इन्द्रजौ, गजपीपल, सेंधानमक, पीपल, लौंग, जायफल , शुद्ध टंकण, लौह भस्म, अभ्रक भस्म, शद्ध पारद, शुद्ध गन्धक-ये द्रव्य पृथक्‌-पृथक्‌ 1-1 भाग लेकर प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बनावें। पश्चात्‌ भस्में एवं अन्य चूर्ण करने योग्य द्रव्यों…

  • Murachantak Ras

    Post Views: 19 मूर्च्छान्तक रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  रससिन्दूर, स्वर्णमाक्षिक भस्म, स्वर्ण भस्म, शुद्ध शिलाजीत, लौह भस्म–प्रत्येक 1-1 भाग लेकर सबको एकत्र मिला करके शतावरी और विदारीकन्द के स्वरस या क्वाथ में 1-1 भावना देकर दृढ़ मर्दन करें। गोली बनाने योग्य होने पर 1-1 रत्ती की गोली…

  • Shakar Vallabh Ras

    Post Views: 13 शक्रवल्लभ रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक, लौह भस्म, अभ्रक भस्म, चाँदी भस्म, स्वर्ण भस्म और स्वर्ण माक्षिक भस्म 3-3 माशे, वंशलोचन 1 तोला और भाँग के बीज का चूर्ण 4 तोला लेकर प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बनावें। फिर उसमें अन्य औषधियों…