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    Post Views: 287 कुटजावलेह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसके सेवन से कच्चे-पक्के, रंग-बिरंगे और वेदनायुक्त सब प्रकार के अतिसार, दुःसाध्य संग्रहणी तथा प्रवाहिका (पेचिश) का नाश होता है। मरोड़ के दस्तों में जब कि भयंकर रीति से दस्त के साथ खून गिरता है, उस सयम इस अवलेह के सेवन से बहुत जल्द…

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    Post Views: 560 गुडूच्यादि लौह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इस लौह के सेवन से वात-रक्त तथा फोड़े-फुन्सी आदि आराम होते हैं। इसमें लौह की प्रधानता से रक्त शुद्ध होकर खून की वृद्धि होती है। पित्तजन्य विकारों में भी यह फायदा पहुँचाता है। प्रकुपित पित्त के कारण रक्त दूषित होने से शरीर के ऊपर…

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    Post Views: 298 कनकारिष्ट ( रक्तशोधक ) गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसे प्रातःकाल बिना कुछ खाये ही सेवन करगे से पुराना कुष्ठ एक मास में शान्त हो जाता है। यह अरिष्ट रक्त-शोधक है। अतएव इसका प्रयोग रक्त-विकार में करने से विशेष लाभ होता है। प्रमेहपीड़िका, शंरीर में छोटी-छोटी फुन्सियाँ हो जाना, खून की…

  • Shothari Mandur

    Post Views: 234 शोधारि मण्डूर गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- यकृत्‌-प्लीहा  मल-संचय अथवा पाण्डु रोग आदि किसी भी कारण से शरीर सूज गया हो, साथ ही कफ, खाँसी ज्वरदिक उपद्रव भी रहते हों तो इसके उपयोग से बहुत शीघ्र फायदा होता है। इसमें मण्डूर भस्म प्रधान है तथा गोमूत्र का क्षार भी सम्मिश्रित…

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    Post Views: 363 आर्द्रक पाक गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसके सेवन से श्वास, कास, स्वरभंग, अरुचि, स्मरण-शक्ति की कमी, सूजन, ग्रहणी, शूल, आनाह, उदररोग, गुल्म आदि रोग न्ट होते हैं। वात और कफ प्रधान रोगों में इस पाक के उपयोग से अच्छा लाभ होता है। यह कफघ्न है, अतएव श्वास, कास, स्वरभंग…