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    Post Views: 275 अमृतभल्लातक गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- समस्त प्रकार के कफ और वातरोगों में विशेषतः जीर्ण प्रतिश्याय, पक्षाघात और कमर के दर्द में इसका उत्तम उपयोग होता है। यह योग उत्तम रसायन में वीर्यवर्द्धक और बाजीकरण है। इसका सेवन करने वाले मनुष्य को गरम भोजन, अधिक गरम जल से स्नान, धूप…

  • Sheet Jwaradi Ras

    Post Views: 11 शीतज्वरादि रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation): –  शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक, शुद्ध मैनशिल, शुद्ध हरताल, ताँबे की भस्म, शुद्ध तृतिया-प्रत्येक 1-1 तोला लें। प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बनावें, फिर उसमें अन्य औषधें मिलाकर सबको त्रिफला के क्वाथ में खरल कर गोला बना, सराब-सम्पुट में बन्द कर…

  • Vednantak Ras

    Post Views: 20 वेदनान्तक रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध अफीम 3 माशे, कपूर 3 माशे, खुरासानी अजवायन का महीन चूर्ण 3 माशे और रससिन्दूर 6 माशे में प्रथम रससिन्दूर को खूब महीन पीस कर उसमें खुरासानी अजवायन का कपड़छन किया हुआ चूर्ण मिला, अफीम को पानी में…

  • Jwarshoolhar Ras

    Post Views: 22 ज्वरशूलहर रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –   शुद्ध पारद, शुद्ध गन्धक ये प्रत्येक 5-5 तोला लेकर सूक्ष्म कज्जली बनावे, इस कज्जली को एक मजबूत लोहे की कड़ाही में रखें, पश्चात्‌ इस कज्जली पर शुद्ध ताम्र की एक कटोरी या तश्तरी अधोमुख (उल्टी) रखकर सन्धि बन्द…

  • Draksharist

    Post Views: 435 द्राक्षारिष्ट गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : यह भूख बढ़ाता, दस्त साफ लाता, कब्जियत को दूर करता, ताकत पैदा करता, नींद लाता, थकावट को दूर करता, दिल और दिमाग में ताजगी पदा करता तथा शरीर के प्रत्येक अङ्ग को ताकत देता है। कफ, खाँसी, सर्दी, जुकाम, हरारत, कमजोरी, क्षय, बेहोशी, आदि रोगों…

  • Effect of Vaat ,Pitt and Kaph on digetion

    Post Views: 291 दोषों का अग्नि से सम्बन्ध तैर्भवेद्विषमस्तीक्ष्णो मन्दश्चाग्निः समैः समः ।।८।। (अ.ह.सू.अ-1) वात के कारण अग्नि विषम, पित्त के कारण तीक्ष्ण और कफ के कारण मन्द होती है। वात-पित्त-कफ के समान होने से अग्नि भी समान होती है ॥८॥ वक्तव्य — विषम अग्नि – वायु के अपने स्वभाव एवं क्रिया के चंचल, अस्थिर…