Hemabhar Sindur
हेमाभ्रक-सिन्दूर
मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation): – अभ्रक भस्म, रससिन्दूर, स्वर्ण भस्म–इन तीनों को समान भाग लेकर खरल में डालकर अदरक के रस से घोंट, सुखा और पीस कर रख लें।
मात्रा और अनुपान (Dose and Anupan) :- 1 रत्ती प्रातः-सायं मधु में मिलाकर या रोगानुसार उचित अनुपान के साथ दें।
गुण और उपयोग (Uses and Benefits) :-
- यह रसायन क्षयरोग, क्षयज पाण्डु रोग, क्षयज कास, कुष्ठ रोग, स्नायु दौर्बल्य, कठिन वात रोग, हृदय की दुर्बलता, मस्तिष्क विकार, वातवाहिनियों का संकुचित होना आदि विकारों में उत्तम गुणकारी है।
- इस रसायन को 40 दिन तक सेवन करना चाहिए।
- अनुलोमक्षय और प्रतिलोमक्षय दोनों प्रकार के क्षय रोगों में इसके सेवन से श्रेष्ठ लाभ होता है।
- किसी भी जीर्ण विकार में उत्पन्न हुई दुर्बलता को नष्ट करने में यह अद्भुत प्रभावशाली है।
- पाण्डु, कामला, हलीमक आदि रक्ताल्पताजन्य रोगों में इसके कुछ काल तक नियमित सेवन से रस-रक्तादि समस्त धातुओं की वृद्धि हो कर शरीर हृष्ट-पुष्ट एवं शक्ति-संपन्न बन जाता है।
This content is for informational purposes only. Always consult a certified medical professional before using any medicines.
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