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  • Panchgun Tel

    Post Views: 289 पंचगुण तैल गुण और उपयोग (Uses and Benefits): संधिवात में और शरीर के किसी भी अवयव में शूल (दर्द) में हल्के हाथ से मालिश करें। कर्णशूल में कान में डालें। सब प्रकार के वर्णों में ब्रण क़ो नीम और सम्भालू की बत्ती के क्वाथ से धोकर, उस पर इस तैल में भिंगोई…

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    Post Views: 293 अमृतप्राशावलेह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- यह उत्तम पौष्टिक है। खाँसी, क्षय, दमा, दाह, तृषा, रक्तपित्त और शुक्रक्षय में इसका प्रयोग करें। कृश और जिनके शरीर का वर्ण और स्वर क्षीण हो गया हो उनको, तथा विशेष स्री-प्रसङ्ग करने वालों और रोगों से कृश हुए व्यक्तियों को यह पुष्ट करता…

  • Khamire Gaozeban

    Post Views: 199 खमीरे गावजवान ( अम्बरी ) गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- यह खमीरा हृदय, मस्तिष्क और पाचकसंस्थान को बल देता है। मस्तिष्क और हृदय अपना कार्य व्यवस्थित रूप से नहीं करते हैं, उस स्थिति में इसके सेवन से अच्छा लाभ होता है। यह औषध प्रायः सभी प्रकृतिवालों के लिये अनुकूल रहती…

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    Post Views: 161 पत्रांगासव गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : इसके सेवन से रक्त-श्वेत प्रदर, दर्द के साथ रज निकलना, ज्वर, पाण्डु, सूजन, अरुचि, अग्निमान्द्य, गर्भाशय के अवयवों की शिथिलता, कमजोरी, दुष्टार्त आदि रोग नष्ट होते हैं। इस आसव का प्रभाव स्त्रीयों के कटि (कमर) प्रदेश के अवयवों पर विशेष होता है। यह स्त्रीयों के…