Similar Posts

  • Sidhvardamrit Ras

    Post Views: 5 सिद्धवरदामृत रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation): –  चार तोला की शुद्ध हिंगुल की एक डली लेकर उसको चारों ओर से सूत के तागे से खूब अच्छी तरह से लपेट दें। पश्चात्‌ इसको एक लोहे की कड़ाही या कड़ाही सदृश मिट्टी के पात्र में रखकर चूल्हे पर…

  • Amritprash Avleh

    Post Views: 290 अमृतप्राशावलेह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- यह उत्तम पौष्टिक है। खाँसी, क्षय, दमा, दाह, तृषा, रक्तपित्त और शुक्रक्षय में इसका प्रयोग करें। कृश और जिनके शरीर का वर्ण और स्वर क्षीण हो गया हो उनको, तथा विशेष स्री-प्रसङ्ग करने वालों और रोगों से कृश हुए व्यक्तियों को यह पुष्ट करता…

  • Drakshasava

    Post Views: 230 द्राक्षासव गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : इसके सेवन से ग्रहणी, बवासीर, क्षय, दमा, खाँसी, काली खाँसी और गले के रोग, मस्तक रोग, नेत्र रोग, रक्तदोष, कुष्ठ, कृमि, पाण्डु, कामला, दुर्बलता, कमजोरी, आमज्वर आदि नष्ट हो जाते हैं। यह सौम्य, पौष्टिक तथा बलवीर्यवर्द्धक है। मात्रा और अनुपान  (Dose and Anupan)  :- 2 से…

  • Guduchiadi Kwath

    Post Views: 37 गूडूच्यादि क्वाथ गुण और उपयोग (Uses and Benefits– यह क्वाथ सब प्रकार के ज्वर, दाह, जी मिचलाना, वमन होना और अरुचि आदि को भी दूर करता तथा अग्नि को भी प्रदीप्त करता है। इस क्वाथ में रोहेड़ा की छाल, दारुहल्दी, सरफोंका की जड़ और पुनर्नवा (गदहपुर्ना) -के मूल, ये चार दवा और…

  • Vatgajankush Ras

    Post Views: 42 वातगजांकुश रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  पारद भस्म (रससिन्दूर), लौह भस्म, स्वर्णमाक्षिक भस्म, शुद्ध गन्धक, शुद्ध हरताल, हर्रे, ककड़ासिंगी, शुद्ध बच्छनाग, सोंठ, मिर्च, पीपल, अरनी की जड़ की छाल, सुहागा प्रत्येक समान भाग लें। प्रथम पारा-गन्धक को कज्जली बना लें, फिर उसमें काष्ठौषधियों का कपड़छन…

  • Samshankar Loh

    Post Views: 268 समशंकर लौह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसके सेवन से वातज, कफज, पित्त और क्षयजन्य खाँसी, रक्त-पित्त, और श्वास रोग नष्ट होता है। यह दुर्बल व्यक्तियों के शरीर को पुष्ट कर बल, वर्ण और वीर्य की वृद्धि करता है। यह दवा सौम्य गुण प्रधान होने के कारण पित्तशामक, रक्तशोधक तथा…