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    Post Views: 180 अम्लपित्तान्तक लौह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इस औषध के सेवन से समस्त प्रकार के अम्लपित्त रोग नष्ट होते हैं तथा समस्त प्रकार के शूल रोगों को नष्ट करने के लिए परम गुणकारी औषध है। यकृत्‌ और पित्ताशय की विकृति नष्ट करके पित्त की विदग्धता को नष्ट करना इस औषध…

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    Post Views: 129 चैतस घृत गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : इस घृत का अधिकतर उपयोग मानसिक रोगों में किया जाता है। उन्माद रोग की प्रारम्भिक अवस्था में इसके उपयोग से बहुत लाभ होता है। इसी तरह हिस्टीरिया, मृगी (अपस्मार), मूर्च्छा, सन्यास आदि रोगों में भी इसके उपयोग से लाभ होता है। मात्रा और अनुपान …

  • Balark Ras ( Plain)

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    Post Views: 148 पुनर्नवारिष्ट गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : इसके सेवन से पाण्डु, इद्रोग, बढ़ा हुआ शोथ, प्लीहा, भ्रम, अरुचि, प्रमेह, गुल्म भगन्दर, अर्श, उदर रोग, खाँसी, श्वास, संग्रहणी, कोढ़, खुजली, शाखागत वायु, मल बन्ध, हिचकी, किलास, कुष्ठ और हलीमक रोग नष्ट होते हैं। इस अरिष्ट का प्रभाव वृक्क (मूत्रपिण्ड), यकृत-प्लीहा और हृदय पर…

  • Sannipat Bharava Ras

    Post Views: 12 सन्निपातभैरव रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation): –  शुद्ध हिंगुल 4 तोला, शुद्ध गन्धक 2 तोला, शुद्ध बच्छनाग 2 तोला, शुद्ध धतूर बीज 3 तोला 2 माशा, सुहागे की खील 1 तोला 1 माशा-इन सबको एकत्र मिला जम्बीरी नींबू के रस में खरल कर, 1-1 रत्ती की…

  • Makardhwaj Gutika ( Swarn Kasturi Yukat )

    Post Views: 17 मकरध्वज गुटिका ( स्वर्ण-कस्तूरी-युक्त ) मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  जायफल, लौंग, कपूर, कालीमिर्च (छिलका उतारी हुई)–प्रत्येक 1-1 तोला स्वर्ण भस्म या वर्क 1 माशा, कस्तूरी 1 माशा, मकरध्वज 4 तोला 2 माशा लें। प्रथम मकरध्वज को खरल में डालकर सूक्ष्म मर्दन करें। पश्चात्‌ चूर्ण करने…