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    Post Views: 275 दोषों का अग्नि से सम्बन्ध तैर्भवेद्विषमस्तीक्ष्णो मन्दश्चाग्निः समैः समः ।।८।। (अ.ह.सू.अ-1) वात के कारण अग्नि विषम, पित्त के कारण तीक्ष्ण और कफ के कारण मन्द होती है। वात-पित्त-कफ के समान होने से अग्नि भी समान होती है ॥८॥ वक्तव्य — विषम अग्नि – वायु के अपने स्वभाव एवं क्रिया के चंचल, अस्थिर…

  • Dantiarist

    Post Views: 293 दन्ती-अरिष्ट गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : इसके सेवन से बवासीर, ग्रहणी, पाण्डु, अरुचि आदि रोग नष्ट होते हैं। इसके अतिरिक्त यह मल और वायु का अनुलोएन करता तथा अग्नि को प्रदीप्त करता है। इसका उपयोग विशेषतया अर्श रोग में किया जाता है। बवासीर में भी यह बादी में जितना लाभ करता…

  • Narikel Khand Pak

    Post Views: 313 नारिकेल खण्डपाक इसके सेवन सें पुरुषत्व, निद्रा और बल की वृद्धि होती है तथा अम्लपित्त, परिणामशूल और क्षय का नाश होता है। गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसमें प्रधान द्रव्य नारियल है, जिससे शीतवीर्य, स्निग्ध और पौष्टिक होने के कारण इस पाक का प्रयोग पैत्तिक बीमारियों में तथा शुक्र-क्षयादि के…

  • Kaskuthar Ras

    Post Views: 26 कासकुठार रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध सिंगरफ, काली मिर्च, शुद्ध गन्धक, त्रिकुटा और सुहागे की खील प्रत्येक समभाग लेकर मर्दन कर रख लें। र. रा. सु. मात्रा और अनुपान  (Dose and Anupan)–  1-2 रत्ती, सुबह-शाम अदरकं रस और मधु के साथ दें। गुण और उपयोग…

  • Kamlahar Ras

    Post Views: 32 कामलाहर रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारा 4 तोला, शुद्ध गन्धक 4 तोला, त्रिफला चूर्ण 16 तोला, यवक्षार 8 तोला, शुद्ध सज्जीखार 8 तोला, नौसादर सत्त्व 8 तोला लेवें प्रथम पारद-गन्धक की कञ्जली बना, उनमें अन्य दवा मिला, 3 घण्टे तक मर्दन…

  • Mandur Vatak

    Post Views: 315 मण्डूर वटक गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- यह पाण्डु, कामला, यकृत्‌-प्लीहा-वृद्धि, शोथ, प्रमेह, बवासीर, कफ-विकार, अजीर्ण आदि रोगों को नाश करता है। इससे रक्त की वृद्धि हो शरीर बलवान हो जाता है एवं उत्तरोत्तर सभी धातुएँ बलवान होकर शरीर हष्ट-पुष्ट हो जाता है। मेदवृद्धिजन्य विकारों में भी यह उत्तम लाभकारी…