grahni rog

  • Hiranyegarbh Potli

    हिरण्यगर्भ पोटली मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation): –  शुद्ध पारद 1 तोला, स्वर्ण भम्म 2 तोला, मोती भस्म 4 तोला, शंख भस्म 6 तोला, शुद्ध गन्धक 3 तोला, कौड़ी भस्म 3 तोला, सुहागे की खील चौथाई तोला लेकर प्रथम पारा गन्धक की कज्जली बनावें, फिर उसमें अन्य औषधियाँ मिलाकर सबको…

  • Grahnivihir Tel

    ग्रहणीमिहिर तैल गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : यह सब प्रकार की ग्रहणी, अतिसार, ज्वर, तृष्णा, श्वास, हिक्का और उदर रोगों का नाश करता है। यह तेल रसायन हैं और अकाल में केश (बाल) पकने को रोकता है तथा देह की ढीली चमड़ी को सख्त करता है। इसे यथोचित अनुपान के साथ 3-6 माशे की…