Nidrodye Ras
निद्रोदय रस
मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation) – रससिन्दूर, वंशलोचन, शुद्ध अफीम–प्रत्येक 6-6 माशा, धाय के फूल और आंवले का कपड़छन किया हुआ महीन चूर्ण 2-2 तोला लेकर सब को खरल में डाल, भांग की पत्तियों के रस में 3 दिन घोंटें। फिर इसमें 2 तोला मुनक्का पीसकर मिला दें और 4-4 रत्ती की गोलियाँ बनावें। बक्तव्य मूल ग्रन्थ पाठ में आठ रत्ती परिमाण की गोलियाँ बनाने का विधान है–परनतु इतनी बड़ी लेने में असुविधा होने से 4-4 रत्ती की गोलियाँ बनाकर मात्रा में एक के बजाय दो गोली कर दी गयी है।
मात्रा और अनुपान (Dose and Anupan)– 2-2 गोली रात को सोते समय जल यां दुध अथवा मलाई में मिला कर दें।
गुण और उपयोग (Uses and Benefits) :
- इस रसायन में अफीम पड़ी हुई है। अतएव, इसका प्रभाव सर्वप्रथम संज्ञावाहिनी नाडिरों पर तथा हृदय और मांसपेशियों पर ज्यादा होता है।
- यह पीड़ाशामका तथा कुछ स्तम्भक भी हैं; निद्रा लाना इसका खास गुण हैं।
- यदि किसी रोग अथवा मानसिक कष्ट या दर्द के मारे निद्रा नहीं आती हो, रोगी बराबर छटपटाता और परेशान होता हो, तो ऐसी स्थिति में निद्रोदय रस के सेवन से पीड़ा (दर्द) दूर होकर निद्रा आती है।
- भांग के रस में घुटाई करने से इसमें निश्वेत्पादक गुणों की पर्याप्त वृद्धि हो जाती है। इसमें बंशलोचन और आमला शीतवीर्य एवं शामकं होने से अहिफेन की उष्णता का शमन कर देते हैं।
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