Convolvulus Pluricaulis
शङ्खपुष्पी
शङ्खपुष्पी हिमा तिक्ता मेधाकत् स्वरकारिणी ।
प्रहभूतादिदोषध्नी वशीकरणसिद्धिदा ॥ १३३ ॥ R.N
गुण और कर्म (medicinal properties and uses) :-
- शङ्खपुष्पी, शीतवीर्यं तिक्तरसयुक्त मेधाकारक तथा स्वर ठीक करने वाली है
- यह ग्रह, भूत आदि दोषों को नाश करने वाली है
- तथा वशीकरण सिद्धि को देने वाली है।
औषधीय गुण ( Medicinal properties)
गुण- स्निग्ध, पिच्छिल, गुरु, सर
रस–कषाय, कट्, तिक्त ।
विपाक–मधुर ।
वीर्य- शीत ।
प्रयोज्यांग- पंचांग का चूर्ण या स्वरस या फाण्ट ।
मात्रा: स्वरस-२०ग्राम-४० ग्राम । फाण्ट–२० ग्राम-५० ग्राम | चूर्ण ३ ग्राम-६ ग्राम ।
विशिष्ट योग–शंखघुष्पी-पानक, सस्रतादि रसायन ।
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