Benincasa Hispida
कुष्माण्ड
मूत्राघातहरं प्रमेहशमनं कृच्छाश्मरीच्छेदनं विण्मूत्रग्लपनं तृषात्तिशमनं जीर्णाङ्गपुष्टिप्रदम् ।
वृष्यं स्वादुतरं त्वरोचकहरं बल्यं च पित्तापहं कुष्माण्डं प्रवरं वदन्ति भिषजो वल्लीफलानां पुनः ॥१६१॥
गुण और कर्म (medicinal properties and uses) :-
- कुष्माण्ड ( कुम्हड़ा ) मूत्रघात को दूर करने वाला, प्रमेह-शामक, मूत्रकृच्छु
तथा पथरी छेदन करने वाला, मलमूत्र निकालने वाला, प्यास की पीड़ा को शान्त करने वाला, जीर्ण- क्षीर्ण अंग को स्वस्थ करने वाला, वीर्यवद्धक, स्वादिष्ट, अरोचकनाशक, बलकारक तथा पित्तनाशक होता है । - वैद्य प्रवर बल्ली ( लता वाले ) फलों में कुष्माण्ड को उत्तम फल कहते हैं ।
औषधीय गुण (Medicinal properties)
गुण–लघु, स्निग्ध ।
रस–मघुर ।
विपाक–मधुर ।
वीर्य–शीत ।
प्रभाव–मेध्य ।
प्रयोज्य अंग–फल, फलस्वरस, बीज, बीज तेल, पत्र ।
मात्रा–फल १-२ तो०, फलस्वरस १-२ तो०, बीज चूण ३-६ मा०, बीजतेल 1/२ -1 तो, पत्र ( बाह्य प्रयोग में ) ।
विशिष्ट योग–कूष्माण्ड खण्ड, कूष्माण्ड गुड कल्याणक, कूष्माण्डघुत, कूष्माण्ड चूर्ण
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