Similar Posts

  • Hydrocotyle asiatica

    Post Views: 9 ब्राह्मी ब्राह्मी हिमा कषाया च तिक्ता वातास्रपित्तजित । बुद्ध प्रज्ञां च मेधां च कुर्य्यादायुष्यबद्धेनी ।। ६६ ॥  रा.नि. ब्राह्मी के गुण और कर्म (medicinal properties and uses) :- ब्राह्मी शीतवीर्य , कषाय रस, विपाक में तिक्त है। वातरक्त तथा पित्तविकार को शान्त करती है। यह बुद्धि, प्रज्ञाशक्ति एवं मेधाशक्ति को देती है…

  • Convolvulus Pluricaulis

    Post Views: 8 शङ्खपुष्पी शङ्खपुष्पी हिमा तिक्ता मेधाकत्‌ स्वरकारिणी । प्रहभूतादिदोषध्नी वशीकरणसिद्धिदा ॥ १३३ ॥ R.N गुण और कर्म (medicinal properties and uses) :- शङ्खपुष्पी, शीतवीर्यं तिक्तरसयुक्त मेधाकारक तथा स्वर ठीक करने वाली है यह ग्रह, भूत आदि दोषों को नाश करने वाली है तथा वशीकरण सिद्धि को देने वाली है। औषधीय गुण ( Medicinal…

  • Celastrus panniculata

    Post Views: 5 ज्योतिष्मती ज्योतिष्मती तिक्तरसा च रुक्षा किञ्चित्कटुर्वीतकफापहा च | दाहप्रदा दीपनकृच्च मेध्या प्रज्ञाञ्च पुष्णाति तथा द्वितीया ।।, ८५६ ॥ R.N गुण और कर्म (medicinal properties and uses) :- ज्योतिष्मती तिक्ष्ण रस से युक्त रूक्ष तथा थोड़ा कटु रस वाली होती है । यह बात-कफ को नाश करने वाली, दाहकारक, जाठराग्निदीपक एवं बुदधिवद्धंक है…