Hydrocotyle asiatica
ब्राह्मी
ब्राह्मी हिमा कषाया च तिक्ता वातास्रपित्तजित ।
बुद्ध प्रज्ञां च मेधां च कुर्य्यादायुष्यबद्धेनी ।। ६६ ॥ रा.नि.
ब्राह्मी के गुण और कर्म (medicinal properties an uses) :-
- ब्राह्मी शीतवीर्य , कषाय रस, विपाक में तिक्त है।
- वातरक्त तथा पित्तविकार को शान्त करती है।
- यह बुद्धि, प्रज्ञाशक्ति एवं मेधाशक्ति को देती है तथा आयुवर्धक है ।। ६६ ॥
प्रयोज्य अङ्ग ( Part Used):- पच्चाङ्ग
मात्रा (Dose): स्वरस १-२ तो०, मूलचूण ३-१२ र० पश्चाग चूर्णे २-५ मा०
विशिष्ट योग ( Specific formulations ): ब्राह्मीपाक, ब्राह्मीपानक, सारस्वतारिष्ठ, सारस्वतड़त, ब्राह्मीतेल, ब्राह्मीसत्त्व, ब्राह्मीमलहर आदि ।
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