Similar Posts

  • Bharangi Gud

    Post Views: 612 भार्गी गुड़ गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसके सेवन से दारुण श्वास तथा सब प्रकार के कास नष्ट होते हैं। यह स्वर को साफ करता और अग्नि (जठराग्नि) को प्रदीप्त करता है। पुराने कास-श्वास वाले रोगी के लिए यह अमृत के समान फायदा करता है, क्योंकि इसका प्रभाव वातवाहिनी तथा…

  • Chosathpehri Pippli

    Post Views: 30 चौंसठप्रहरी पीपल मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  छोटी पीपल का सूक्ष्म कपड़छन चूर्ण 10 तोला, पीपल बड़ी का फाण्ट 10 तोला लेकर चूर्ण में मिला, खरल में डाल कर 64 प्रहर तक मर्दन करें पश्चात्‌ छाया में सुखा कर पीस करके सुरक्षित रख लें। मात्रा और…

  • Panchgun Tel

    Post Views: 290 पंचगुण तैल गुण और उपयोग (Uses and Benefits): संधिवात में और शरीर के किसी भी अवयव में शूल (दर्द) में हल्के हाथ से मालिश करें। कर्णशूल में कान में डालें। सब प्रकार के वर्णों में ब्रण क़ो नीम और सम्भालू की बत्ती के क्वाथ से धोकर, उस पर इस तैल में भिंगोई…

  • Vidangadi Loh

    Post Views: 222 विडंगादि लौह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसके सेवन से उदर-कृमि, अर्श-अरुचि, मन्दाग्नि, विसूचिका (हैजा), शोथ, शूल, ज्वर, हिक्का, कास और श्वास का नाश होता है। कृमि रोग में इसका विशेषतया उपयोग किया जाता है। कृमिरोग में लम्बे, गोल, मूत्राकार, चपटे आदि अनेक प्रकार के कृमि आंतों में चिपके रहते…

  • Balark Ras

    Post Views: 21 बालार्क रस ( केशर-गोरोचन-युक्त ) मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध खपरिया या शहद भस्म, प्रवाल भस्म या पिष्टीं, मृगशृङ्ग भस्म, शुद्ध हिंगुल, गोरोचन, कचूर और केशर प्रत्येक समभाग लेकर ब्राह्मी-स्वरस में 1 दिन मर्दन करके 1-1 रत्ती की गोलियाँ बना, छाया में सुखाकर शीशी में…

  • Haritiki Khand

    Post Views: 241 हरीतकी खण्ड गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसके सेवन से समस्त प्रकार के शूल रोग नष्ट होते हैं, विशेषतया अम्लपित्तजन्य शूल और अम्लपित्त को शीघ्र नष्ट करता है। इसके अतिरिक्त अर्श, कोष्ठगत वात विकार, वातरोग, कटिशूल और कठिन आनाह रोग को नष्ट करता है। यह उत्तम विरेचक भी है। मात्रा…