Similar Posts

  • Harishankar Ras

    Post Views: 8 हरिशंकर रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation): –  पारद भस्म (रससिन्दूर) तथा अभ्रक भस्म दोनों समान भाग लेकर एक सप्ताह तक आँवला और हल्दी-स्वरस में घोंटकर 1-1 रत्ती की गोलियाँ बना, सुखाकर शीशी में सुरक्षित रख लें। मात्रा और अनुपान  (Dose and Anupan)  :-     1-2 रत्ती…

  • Jwarariabhar Ras

    Post Views: 26 ज्वरारि-अभ्र मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –   शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक, शुद्ध बच्छनाग, अभ्रक भस्म, ताम्र भस्म प्रत्येक 1-1 तोला, धतूर-बीज 2 तोला और त्रिकुटा 5 तोला लें। प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बना फिर कपड़छन किए हुए अन्य औषधियों के महीन चूर्ण को मिलाकर जल से घोंट…

  • Vednantak Ras

    Post Views: 23 वेदनान्तक रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध अफीम 3 माशे, कपूर 3 माशे, खुरासानी अजवायन का महीन चूर्ण 3 माशे और रससिन्दूर 6 माशे में प्रथम रससिन्दूर को खूब महीन पीस कर उसमें खुरासानी अजवायन का कपड़छन किया हुआ चूर्ण मिला, अफीम को पानी में…

  • Argwadhadi Kwath

    Post Views: 73 आरग्वधादि क्वाथ ( दस्तावर ) गुण और उपयोग (Uses and Benefits): ज्यादा दिन तक दस्त कब्ज होने के कारण पेट में गाँठ-सी पड़ जाती है, पेट को दबाने पर सख्त-सा मालूम पड़ता है। रोगी उत्साहहीन और धीरे-धीरे दुर्बल होता है। थोड़ा-थोड़ा बुखार भी रहने लगता, कभी-कभी देह सूज भी जाती है; आंखें…

  • Navayas Loh / Mandur

    Post Views: 299 नवायस मण्डूर /  लौह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- यह लौहकल्प पाचक, दीपक, रसायन और रक्‍तवर्धक है। इसके सेवन से रक्ताणुओ की वृद्धि होती और रक्त-गति का कार्य भी ठीक-ठीक होने लगता है। प्लीहा के दोष या पेट की खराबी से होने वाले बुखार में इस दवा से अच्छा लाभ…

  • Ashavgandhadi Ghrit

    Post Views: 309 अशवगन्धादि घृत गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : इस घृत के उपयोग से संमस्त प्रकार के वात रोग, सन्धि-शूल (जोड़ों का दर्द), कमर का दर्द, किसी भी अङ्ग में आई हुई अशक्तता, भ्रम (चक्कर आना), अनिद्रा आदि विकार नष्ट होते हैं। यह स्नायुमण्डल को अपूर्व शक्ति प्रदान करता है तथा रस-रक्तादि धातुओं…