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  • Bahushal Gud

    Post Views: 478 बाहुशाल गुड़ गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसके सेवन से बवासीर, आमवात, संग्रहणी, प्रमेह प्रतिश्याय, आदि रोग नष्ट होकर मनुष्य बलवान हो जाता है। बवासीर में पेट में वायु भर जाने पर उसे अनुलोमन करने के लिए बाहुशाल गुड़ बहुत प्रसिद्ध दवा है। पाँचों प्रकार के गुल्म, पीनस, पाण्डु, हलीमक,…

  • Dhaniyepanchakarist

    Post Views: 166 धान्यपंचकारिष्ट गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : यह अरिष्ट उत्कृष्ट दीपन, पाचन और ग्राही है। इसका प्रयोग करने से अतिसार, प्रवाहिका और संग्रहणी रोग नष्ट होते हैं। अर्क सौंफ 5 तोला मिला कर पिलाने से यह पित्तातिसार और रक्तातिसार में अच्छा लाभ करता है। वक्तव्य : यह धान्यपंचक क्वाथ का योग है।…

  • Ras Karpoor

    Post Views: 3 रसकपूर मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारद, गेरू मिट्टी, इंट का चूर्ण, खड़िया मिट्टी, फिटकरी, सेंधा नमक, वल्मीके मृत्तिका (वामी की मिट्टी), खारा नमक और बर्तन रंगनेवाली लाल मिट्टी-ये सब समान भाग लेकर पारे के अतिरिक्त अन्य समस्त औषधियों को कूट-कपड़छन चूर्ण बना लें। फिर…

  • Visuchika Vidhwanshan Ras

    Post Views: 12 विसूचीका विध्वंसन रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक, शुद्ध विष, सुहागे की खील, सोंठ, स्वर्णमाक्षिक भस्म, शुद्ध अफीम–प्रत्येक 1-1 तोला और शुद्ध सिंगरफ सब दवाओं के बराबर (7 तोला) लें। प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बना, उसमें सिंगरफ तथा अन्य दवा मिलाकर कुछ…

  • Mansyadi kwath

    Post Views: 31 मांस्यादि क्वाथ गुण और उपयोग (Uses and Benefits) इस क्वाथ का हिस्टीरिया, आक्षेप और बालकों का आक्षेप आदि रोगों में अकेले या अपतन्त्रकारि बटी या वृहद्वातचिन्तामणि या ब्राह्मी बटी (सुवर्ण-युक्त) या सर्पगन्धायोग–इनकेअनुपान रूप में प्रयोग करें। मस्तिष्क के क्षोभ एवं निद्रानाश में भी इसके सेवन से उत्तम लाभ होता है। मात्रा और…