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  • Jaymangal Ras

    Post Views: 22 जयमंगल रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  हिंगुलोत्थ, पारा, शुद्ध गन्धक, सुहागे की खील, ताम्र भस्म, बंग भस्म, सोनामक्खी भस्म, सेंधा नमक, काली मिर्च-प्रत्येक एक-एक तोला, स्वर्ण भस्म 2 तोला, कान्तलौह भस्म तथा चाँदी भस्म 1-1 तोला लें। प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बना फिर उसमें अन्य…

  • Gulbanpshadi kwath

    Post Views: 39 गुलवनप्सादि क्वाथ गुण और उपयोग (Uses and Benefits) सहन करने योग्य गरम इस क्वाथ के सेवन से नवीन या जीर्ण कठिन प्रतिश्याय-विकार (जुकाम), खाँसी, श्‍वास आदि रोग शीघ्र नष्ट होते हैं। विशेषतया से सदी और जुकाम में यह उत्कृष्ट लाभकारी है, जमे हुए कफ को पिघलाकर बाहर निकाल देता है, फफ्फुसों, श्वुसप्रणाली…

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    Kaminividravan Ras

    Post Views: 38 कामिनीविद्रावण रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  अकरकरा, सोंठ, लौंग, केशर, पीपल, जायफल, जावित्री, चन्दन–प्रत्येक 1-1 तोला शुद्ध सिंगफ और शुद्ध गन्धक प्रत्येक चौथाई तोला और शुद्ध अफीम 4 तोला लें। प्रथम सिंगरफ, गन्धक और अफीम को एकत्र घोंट कर रखें। फिर शेष दवा को कूट,…

  • Guduchiadi Tel

    Post Views: 95 गुडूच्यादि तैल गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : इस तेल की मालिश करने से वातरक्त, तिमिर रोग, कुष्ठरोग, त्वचा के विकार, विसर्प, पसीना अधिक आना, खुजली और दाह आदि रोग नष्ट होते हैं। मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation): –  मूर्च्छित तिल तेल 28 तोला, गिलोय का…

  • Balark Ras

    Post Views: 12 बालार्क रस ( केशर-गोरोचन-युक्त ) मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध खपरिया या शहद भस्म, प्रवाल भस्म या पिष्टीं, मृगशृङ्ग भस्म, शुद्ध हिंगुल, गोरोचन, कचूर और केशर प्रत्येक समभाग लेकर ब्राह्मी-स्वरस में 1 दिन मर्दन करके 1-1 रत्ती की गोलियाँ बना, छाया में सुखाकर शीशी में…