vajikaran

  • Shakar Vallabh Ras

    शक्रवल्लभ रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक, लौह भस्म, अभ्रक भस्म, चाँदी भस्म, स्वर्ण भस्म और स्वर्ण माक्षिक भस्म 3-3 माशे, वंशलोचन 1 तोला और भाँग के बीज का चूर्ण 4 तोला लेकर प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बनावें। फिर उसमें अन्य औषधियों का कपड़छन किया…

  • Vatvidhvanshan Ras

    वातविध्वंसन रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक, नाग भस्म, लौह भस्म, अभ्रक भस्म, ताम्र भस्म, पीपल, सुहागे की खील, कालीमिर्च और सोंठ–प्रत्येक 1-1 तोला लें। प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बना, फिर उसमें अन्य औषधियों का कपड़छन किया हुआ महीन चूर्ण मिला, सबको । पहर तक…

  • Vasantkusumakar Ras

    वसंतकुसुमाकर रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  प्रवाल भस्म या पिष्टी,  रससिन्दूर, मोती पिष्टी या भस्म, अभ्रक भस्म प्रत्येक 4-4 तोला, रौप्य (चाँदी) भस्म, सुवर्ण भस्म 2-2 तोला, लौह भस्म, नाग भस्म और बंग भस्म–प्रत्येक 3-3 तोला लेकर सबको पत्थर के खरल में डालकर अडूसे की पत्ती का रस,…

  • Puranchander Ras ( Varihat)

    पूर्णचन्द्र रस ( बृहत्‌ ) मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक 2-2 तोला, लौह भस्म, अभ्रक भस्म 4-4 तोला, चाँदी भस्म और बंग भस्म 2-2 तोला, सुवर्ण भस्म, ताम्र भस्म, कांस्य भस्म, जायफल, लौंग, इलायची बीज, जीरा, दालचीनी, कपूर, फूल प्रियंगु और नागरमोथा–प्रत्येक 1-1 तोला लें।…

  • Piyush Sindhu Ras

    पीयूष सिन्धु रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  समान भाग पारा-गन्धक की कज्जली बना, बालुकायन्त्र में पाक करें। इस प्रकार 6 बार पाक करके 6 गुना गन्धक जारण करके रस-सिन्दूर बनावें। इस प्रकार षड्गुण बलिजारित रससिन्दूर 1 तोला, स्वर्ण भस्म, लौह भस्म, अभ्रक भस्म, शुद्ध गन्धक–प्रत्येक 1-1 तोला मिलाकर…

  • Navjeevan Ras

    नवजीवन रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध कुचला 2 तोला, लौह भस्म 2 तोला, सोंठ, मिर्च, पीपल–इनका मिश्रित सूक्ष्म चूर्ण 2 तोला लेकर प्रथम रससिन्दूर की सूक्ष्म खरल करें, पश्चात्‌ भस्में और अन्य द्रव्यों का चूर्ण मिला अदरक के रस में दृढ़ मर्दन करें। गोली बनने योग्य होने…

  • Chaturbhurj Ras

    चतुर्भुज रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  रस सिन्दूर 2 तोला, स्वर्ण भस्म, शुद्ध मैनशिल, कस्तूरी, शुद्ध हरिताल-् प्रत्येक द्रव्य 1 – 1 तोला लेकर सबको एकत्र मिला ग्वारपाठे के रस में एक दिन तक दृढ़ मर्दन करके गोला बनावें पश्चात्‌ उस गोले को एरण्ड के पत्तों में लपेट…

  • Kaphchintamani Ras

    कफचिन्तामणि रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –   रससिन्दूर 3 तोला, शुद्ध हिंगुल, सुहागे की खील, इन्द्रजौ, भाँग के बीज और काली मिर्च प्रत्येक 1-1 तोला लेकर अदरक के रस में एक प्रहर तक घोंट, चने के बराबर (एक-एक रत्ती की) गोलियाँ बना-सुखाकर रख लें। रसा, सं. मात्रा और…

  • Satavari Gharit

    शतावरी घृत गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : यह घृत उत्तम पौष्टिक, शीतवीर्यं और वाजीकरण है। इस घृत के सेवन से रक्तपित्त रोग नष्ट होते हैं। वातरक्त तथा क्षीण-शुक्र रोगियों के लिए यह अत्यन्त हितकर है और अंगदाह, शिरोदाह, पित्तज्वर, योनिशूल, दाह, मूत्रकृच्छु, विशेषकर पैत्तिक योनिशूल शीघ्र नष्ट होते हैं। यह शरीर के बल,…

  • Narikelasava

    नारिकेलासव गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : यह आसव पौष्टिक, बल-वीर्य बढ़ाने वाला और बाजीकरण है। इसके सेवन से कामशक्ति की वृद्धि होती है। धानुक्षीणता , छोटी आयु में अप्राकृतिक ढंग से शुक्र का नाश करने या अधिक स्वप्न दोष अथवा और भी किसी कारण से वीर्य पतला हो गया हो, वीर्य-वाहिनी नाड़ियाँ शिथिल होकर…

  • Angoor Asava

    अंगूरासव गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- बादाम, पिस्ता, चिरौंजी, अनार, सेव, संतरा, अंगूर आदि उत्तमोत्तम द्रव्यों से निर्मित यह आसव अत्यन्त बाजीकरण, बलवर्धक और पुष्टिकारक है। यह मन्दाग्नि को नष्ट कर क्षुधा की वृद्धि करता है। रस-रक्त, मांस आदि सप्तधातुओं की वृद्धि करता है। शरीर में स्फूर्ति उत्पन्न कर नवीन शुद्ध रक्त निर्माण…

  • Sobhagye Sunthi Pak

    सौभाग्य शुण्ठीपाक गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इस पाक का प्रयोग करने से बल और वायु की वृद्धि होती है, वर्ण को सुन्दर बनाता है, उत्तम पुष्टिकारक है। वली-पलित विकार को नष्ट करता है। यह पाक अत्यन्त वृष्य और रसायन है, स्त्रियों के लिए अमृत-तुल्य लाभकारी है। इसके सेवन से योनिविकार, प्रदर, कष्टातव…