burn wound

  • Saptgun Oil

    सप्तगुण तैल गुण और उपयोग (Uses and Benefits): इस तैल्ल के उपयोग करने से समस्त प्रकार के वातविकार नष्ट होते हें I आग से जलना, चोट लगना, शरीर के किसी भी अंग में मोच आ जाना, वायु का शूल, गठिया, कान का दर्द या बहना, फोड़ा, फुन्सी, शोथ, पार्श्वशूल एवं अनेक प्रकार के ब्रण, नाड़ीव्रण…

  • Vranrakshak Tel

    ब्रणराक्षस तैल गुण और उपयोग (Uses and Benefits): इस तैल की मालिश से समस्त प्रकार के चर्मरोग और प्रण नष्ट होते हैं। इसके अतिरिक्त नाड़ीब्रण {नासूर), विस्फोट, मांस-वृद्धि, विचर्चिका (एक्जिमा), दाद, अपची, ‘ कण्डू, मण्डलकुष्ठ और दुष्ट व्रण नष्ट हो जाते हैं! मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation): –  पारद, गन्धक,…

  • Panchgun Tel

    पंचगुण तैल गुण और उपयोग (Uses and Benefits): संधिवात में और शरीर के किसी भी अवयव में शूल (दर्द) में हल्के हाथ से मालिश करें। कर्णशूल में कान में डालें। सब प्रकार के वर्णों में ब्रण क़ो नीम और सम्भालू की बत्ती के क्वाथ से धोकर, उस पर इस तैल में भिंगोई हुई रुर्ड या…

  • Tuvrak Tel – Chalmogra oil

    तुबरक तैल ( चालमोंगरा तैल ) गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : सबेरे-शाम दिन में दो बार यह तैल पाँच बूँद की मात्रा से आरम्भ करें और प्रति चौथे दिन पाँच बूँद की मात्रा बढ़ाकर 4 तोला तक गाय के ताजे मक्खन या दूध की मलाई में मिलाकर दें। रोगी जितनी मात्रा सहन कर सके,…

  • Jatiyadi Tel

    जात्यादि तैल गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : इस तैल के सब गुण लगभग जात्यादि घृत के समान ही हैं। इसके लगाने से विषाक्त घाव, जैसे-मकड़ी आदि विषैले जन्तुओं के स्पर्श से होने वाले घाव और समधारण घाव, चेचक, खुजली सूखी-गीली दोनों तरह की, विसर्प, शस्रादि से कट जाने पर हुआ घाव, अग्नि से…

  • Jatiyadi Ghrit

    जात्यादि घृत ( मरहम ) गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : यह घृत नाड़ीव्रण (नासूर), पीड़ायुक्त व्रण और जिस व्रण से रक्त. निकलता रहता हो, उस व्रण को तथा मकड़ी के घाव, अग्नि से जलने तथा गहरे घाव भी ठीक करता है। इसको मरहम की भाँति लगाने से मर्मस्थानों के घाव, पीवयुक्त और अधिक फोड़ायुक्त…