bleeding disorder

  • Ratangarbh Potli

    रत्नगर्भपोट्टीली रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  रससिन्दूर, हीरा भस्म, (अभाव में वैक्रान्त भस्म), स्वर्ण भस्म, चाँदी भस्म, नाग भस्म, लौह भस्म, ताम्र भस्म, मोती भस्म, स्वर्णमाक्षिक भस्म, प्रवाल भस्म, शंख भस्म, शुद्ध तूतिया–प्रत्येक समान भाग लेकर, एकत्र मिला, सात दिन तक चित्रक के क्वाथ में घोंटें, फिर उसे…

  • Raktpittkulkandan Ras

    रक्तपित्तकुलकण्डन रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारा, शुद्ध गंधक, प्रवाल भस्म, स्वर्णमाक्षिक भस्म, नाग भस्म, बंग भस्म–प्रत्येक 1-1 तोला लेकर प्रथम पारा-गंधक की कज्जली बनावे, फिर उसमें अन्य औषधियाँ मिलाकर सबको चन्दन, कमल, मालती की कलियाँ, वासक के पत्ते, धनियाँ, गजपीपल, सतावर, सेमल की छाल, बड़-जटा इनके…

  • Bolbadh Ras

    बोलबद्ध रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक, सत्व गिलोय – तोला लेकर कज्जली बनावें। फिर उसमें 3 तोला (हीरादोखी–खून-खराबा) का कपड़छन किया हुआ महीन चूर्ण मिलाकर सबको एक दिन सेमल की छाल के रस या क्वाथ में घोंटकर 2-2 रत्ती की गोलियाँ बना, सुखाकर रख…

  • |

    Mahatikat Ghrit

    महातिक्त घृत गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : यह घृत कुष्ठ, रक्तपित्त, खूनी बवासीर, विसर्प, अम्लपित्त, वातरक्त, -पाण्डु रोग, विस्फोट, यक्ष्मा, उन्माद, कामला, -पामा, कण्डू, जीर्णज्चर, रक्तप्रदर आदि रोगों को नष्ट करता है। शरीर पर लाल चकत्ते हो जाना, फोड़े-फुन्सी होना, उनमें दाह या जलन रहना, पीब या पानी-सा लेस निकलता हो, खुजली के कारण…

  • Durvadi Ghrit

    दूर्वादि घृत गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : यह घृत मुख से रक्त आता हो तो पीने को देना, नाक से रक्त आता हो तो नस्य देना, कान या आँख से रक्त आता हो, तो कान या आँख में डालना और लिङ्ग, योनि अथवा गुदा से रक्त आता हो तो उत्तर बस्ति या अनुवासन…

  • Ushirasava

    उशीरासव गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसके सेवन से नाक, कान, आँखें, मल-मूत्र दवार से होने वाला रक्तस्राव, खूनी बवासीर, स्वप्नदोष, पेशाब में धातु जाना, मूत्रकृच्छ, मूत्राघात, उष्णवात , प्रमेह, बहुमूतर, स्त्रियों के रोग, श्वेत और रक्तप्रदर, ऋतुकाल या प्रसव के बाद में अत्यन्त रक्तस्राव, गर्भाशय-दोष, पेट का दर्द, रजःकृच्छूता, पाण्डु, कुष्ठ, कृमि,…