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  • Jeerakadiarist

    Post Views: 164 जीरकाद्यरिष्ट गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : यह शीतल, रुचिकारक, चरपरा, मधुर, अग्नि को प्रदीप्त करने वाला, विष-दोष शामक तथा पेट के अफरे को दूर करने वाला है। यह थोड़ा उष्ण (गर्म) भी है और गर्भाशय की शुद्धि करता है। इसके अतिरिक्त सूतिका रोग, संग्रहणी, अतिसार और मन्दाग्नि के विकारों को दूर…

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    Post Views: 33 उपदंशकुठार रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –   कुंकुष्ठ (मूर्दासंग), कूठ दोनों एक-एक तोला लें तथा शुद्ध तूतिया आधा तोला, तीनों को खरल में पीसकर अदरक के रस के साथ घोटे। गोली बनाने योग्य होने पर एक-एक रत्ती की गोली बनाकर सुखाकर रख लें। र.चं. गुण और…

  • Yakritplihari Loh

    Post Views: 239 यकृत्‌-प्लीहारि लौह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसके सेवन से पुराने यकृत्‌-प्लीहा के रोग, उदर रोग, पेट फूलना, ज्वर, पाण्डु, कामला, शोथ हलीमक, अग्निमान्द्य और अरुचि का नाश होता है। यकृत्‌ रोग में इसका विशेष रूप से उपयोग किया जाता है। शरीर में यकृत्‌-जैसा दूसरा उपयोगी यंत्र नहीं है। यकृत्‌-रोग…

  • Grahnivihir Tel

    Post Views: 94 ग्रहणीमिहिर तैल गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : यह सब प्रकार की ग्रहणी, अतिसार, ज्वर, तृष्णा, श्वास, हिक्का और उदर रोगों का नाश करता है। यह तेल रसायन हैं और अकाल में केश (बाल) पकने को रोकता है तथा देह की ढीली चमड़ी को सख्त करता है। इसे यथोचित अनुपान के साथ…

  • Kshkhsudradi Kwath

    Post Views: 40 क्षषुद्रादि क्वाथ गुण और उपयोग (Uses and Benefits) इस क्वाथ का सेवन करने से कफ-वातज्वर श्वास- कास अरुचि पार्श्वशूल युक्त ज्वर श्लैष्मिक ज्वर (न्यूमोनिया) आदि विकार नष्ट होते हैं। मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) – छोटी कटेरी की जड़, गिलोय, सौंठ, पुष्करमूल-ये प्रत्येक द्रव्य 3-3 माशे लेकर…