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  • Ashwinikumar Ras

    Post Views: 36 अश्विनीकुमार रस – मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –   सोंठ, पीपल, काली मिर्च, आँवला, हरे, बहेड़ा, अफीम, शुद्ध विष, पीपलामूल, लवंग, शुद्ध जमालगोटा, शुद्ध हरताल, सुहागे की खील, शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक–प्रत्येक 1 – 1 तोला लें। प्रथम पारा और गन्धक की कज्जली बना हरताल, बच्छनाग, जमालगोटा…

  • Samshankar Loh

    Post Views: 268 समशंकर लौह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसके सेवन से वातज, कफज, पित्त और क्षयजन्य खाँसी, रक्त-पित्त, और श्वास रोग नष्ट होता है। यह दुर्बल व्यक्तियों के शरीर को पुष्ट कर बल, वर्ण और वीर्य की वृद्धि करता है। यह दवा सौम्य गुण प्रधान होने के कारण पित्तशामक, रक्तशोधक तथा…

  • Ramban Ras

    Post Views: 12 रामबाण रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक, शुद्ध बच्छनाग, लौंग का चूर्ण-प्रत्येक 1-1 तोला, काली मिर्च का चूर्ण 2 तोला, जायफल का चूर्ण 6 माशे लें। प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बनावें फिर उसमें अन्य औषधें मिलाकर सबको तिन्तड़ीक के क्वाथ या रस…

  • Kantkari Avleh

    Post Views: 224 कंटकार्यवलेह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसके सेवन से श्वास, कास, हिचकी, कफ का छाती में जम जाना आदि रोग नष्ट होते हैं। इसका उपयोग विशेष कर खाँसी और श्वास-रोग में किया जाता है। खाँसी चाहे सूखी या गीली जैसी भी हो, दोनों में लाभ करता है। सूखी खाँसी में…

  • Chitrak Haritiki

    Post Views: 600 चित्रक हरीतकी गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- पुराने और बारम्बार होनेवाले प्रतिश्याय (जुखाम) में इसके सेवन से अच्छा लाभ होता है। खाँसी, पीनस, कृमि रोग, गुल्म, उदावर्त, अर्श, श्वास, मन्दाग्नि में भी यह श्रेष्ठ लाभ करती है। आचार्य यादवजी कहते हैं “इसके सेवन-काल में नाक में दिन में दो बार…