Shivtandava Ras
शिवताण्डव रस
मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation): – शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक, शुद्ध बच्छनाग, रससिन्दूर, शुद्ध हरिताल–प्रत्येक 1-1 तोला, कालीमिर्च का कपड़छन किया हुआ चूर्ण 4 तोला लेकर प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बनावें। फिर शेष औषधियों को मिलाकर अदरक स्वरस के साथ मर्दन कर, 1-1 रत्ती की गोलियाँ बना, छाया में सुखाकर रख लें।
मात्रा और अनुपान (Dose and Anupan) :- 1-1 गोली सुबह-शाम अदरक रस और मधु के साथ दें।
गुण और उपयोग (Uses and Benefits) :
- यह रसायन तीक्ष्ण और उष्ण-वीर्य-प्रधान है।
- सन्निपात की उग्रावस्था में जब दाँती बंध गई हो, शरीर ठंडा पड़ गया हो, पसीना ज्यादा आता हो, कफ की वृद्धि हो रही हो, आँखों की पुतलियाँ तथा नेत्र टेढ़े हो गए हों, नाड़ी की गति बहुत मन्द हो गयी हो, ऐन्द्रिक (इन्द्रियों की) शक्तियां क्षीण हो गयी हों-ऐसी भयंकर परिस्थिति में इस रसायन के उपयोग से बहुत शीघ्र लाभ होता है, क्योंकि यह अपनी तीक्ष्णता के कारण कफदोष नष्ट कर पित्त को जागृत करता और फिर जागृत पित्त खून में मिल कर सम्पूर्ण शरीर में दौड़ता है, जिससे सारा शरीर गर्म हो जाता और शिथिल हुए अवयवो में भी ताकत आ जाती है, जिससे वे अपनी क्रिया करने में समर्थ हो जाते हैं।
This content is for informational purposes only. Always consult a certified medical professional before using any medicines.
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