Saptgun Oil
सप्तगुण तैल
गुण और उपयोग (Uses and Benefits):
- इस तैल्ल के उपयोग करने से समस्त प्रकार के वातविकार नष्ट होते हें I
- आग से जलना, चोट लगना, शरीर के किसी भी अंग में मोच आ जाना, वायु का शूल, गठिया, कान का दर्द या बहना, फोड़ा, फुन्सी, शोथ, पार्श्वशूल एवं अनेक प्रकार के ब्रण, नाड़ीव्रण आदि विकार नष्ट होते हैं।
मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation): – हर्ड़, बहेड़ा, आंवला, नीम की पत्ती, सम्भालू की पत्ती प्रत्येक द्रव्य 5-5 तोला लेकर 4 सेर जल में क्वाथ करें, चतुर्थांश जल शेष रहने पर उतार कर छान लें। पश्चात् गन्धबिरैजा, मोम देशी, शिलारस, राल, गूगल-ये प्रत्येक द्रव्य 4-4 तोला लें और तिल तेल । सेर लेकर, सब द्रव्यों को कड़ाही में एकत्र मिला, मन्द-मन्द अग्नि पर पकावें। इतना ध्यान अवश्य रखें कि उत्ताप विशेष बढ़कर तैल में आग न लग जाय। जब तैल पकते-पकते खरपाक हो जाय और तैल कल्क से पृथक् हो जाय तो उतार लें और छानकर मामूली गरम में ही 5 तोला कपूर मिला दें। पश्चात् शीतल हो जाने पर तारपीन तैल 2 तोला, यूकेलिप्टस आयल (नीलगिरी तैल) 2 तोला, आयल काजूपुट 2 तोला–ये तीनों द्रव्य मिलाकर सुरक्षित रखें। –आनुभविक योग
This content is for informational purposes only. Always consult a certified medical professional before using any medicines.
Book Your Online Consultation