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    Post Views: 15 प्रतापलंकेशवर रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक, अभ्रक भस्म, शुद्ध बच्छनाग 1-1 तोला, काली मिर्च का चूर्ण 3 तोला, लौह भस्म 4 तोला, शंख भस्म 8 तोला और अरण्य उपलों (बनगोइठा) की भस्म 16 तोला लेकर प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बनावे, फिर…

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    Post Views: 159 जीरकाद्यरिष्ट गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : यह शीतल, रुचिकारक, चरपरा, मधुर, अग्नि को प्रदीप्त करने वाला, विष-दोष शामक तथा पेट के अफरे को दूर करने वाला है। यह थोड़ा उष्ण (गर्म) भी है और गर्भाशय की शुद्धि करता है। इसके अतिरिक्त सूतिका रोग, संग्रहणी, अतिसार और मन्दाग्नि के विकारों को दूर…

  • Chandanadi Tel

    Post Views: 126 चन्दनादि तैल गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : यह चन्दनादि तैल रक्त-पित्त, क्षय, ज्वर, पसीना की दुर्गन्ध, जीर्णज्वर, अपस्मार, उन्माद, सिर-दर्द, धातु की विकृति आदि रोगों को दूर कर शरीर की कान्ति बढ़ाता और दीर्घायु प्रदान करता है। यह तैल सौम्य (शीतल) गुण-प्रधान होने के कारण पित्त-विकारों में लाभदायक है। मुख्य…

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