Raspipari ( Kasturi Yukat )
रसपीपरी ( कस्तूरी-युक्त )
मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation) – शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक, सोंठ, मिर्च, पीपल, काकड़ासिंगी, अतीस, नागरमोथा मोचरस, जायफल, जावित्री, सुहागे की खील, छोटी पीपल–प्रत्येक समान भाग लें। प्रथम पारा-गन्थक की कज्जली बना शेष काष्ठौषधियों का कपड़छन चूर्ण मिलाकर पारे के अष्टमांश कस्तूरी मिला, जल संयोग से मूँग के बराबर गोलियाँ बना लें अथवा महीन पीसकर कपड़छन कर रख लें।
मात्रा और अनुपान (Dose and Anupan)– 1 से 2 रत्ती चार-चार घण्टे बाद अदरक के रस और मधु से दें। पतले दस्त होने पर जायफल को पानी में घिसकर उसके साथ देना चाहिए।
गुण और उपयोग (Uses and Benefits) :
- यह औषध बच्चों के लिये अमृततुल्य गुणकारी है।
- अनुपान भेद से इससे बच्चों के अनेक रोग आराम होते हैं।
- सर्दी, जुकाम, कफ, खाँसी, बुखार, कमजोरी, वमन, पतली टट्टी आदि बाल रोगों में यह दवा अच्छा काम करती है।
- माता की तरह बच्चों की रक्षा करती है।
- इस दवा का उपयोग बिहार प्रांत के घर-घर में बच्चों की बीमारियों में किया जाता है।
- वहाँ की साधारण जनता भी इस दवा से इतनी परिचित है कि बच्चों को किसी भी तरह की — बीमारी होने पर इसे निर्भयतापूर्वक दिया करती है और इससे फायदा भी अच्छा होता है।
रसपीपरी ( साधारण )
उपरोक्त रसपीपरी के योग में कस्तूरी मिलाकर बनाने से वह रसपीपरी (साधारण) बन जाती है, सर्वसाधारण लोग जो कीमती दवा नहीं ले सकते हैं, उनके लिये यह उत्तम दवा है। इसमें उपरोक्त से कुछ ही न्यून गुण हैं। मात्रा, अनुपान, सेवन-विधि, गुण-धर्म प्रायः समान ही है।
This content is for informational purposes only. Always consult a certified medical professional before using any medicines.
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