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  • Karvyad Ras

    Post Views: 42 क्रव्याद रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –   शुद्ध पारा 4 तोला, शुद्ध गन्धक 8 तोला, ताम्र भस्म 2 तोला, लौह भस्म 2 तोला, शुद्ध टंकण 16 तोला, विड (काला) नमक 8 तोला, काली मिर्च 40 तोला। पहले पारा औरं गन्धक की कज्जली बना, फिर लौह और…

  • Laxmivilas Ras ( Kasa )

    Post Views: 14 लक्ष्मीविलास रस ( रसेन्द्र-कास ) मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारद 4 तोला, शुद्ध हरिताल 4 तोला, खर्पर भस्म 2 तोला, बंग भस्म, ताम्र भस्म, अभ्रक भस्म, कान्त लौह भस्म, कांस्य भस्म, शुद्ध गन्धक-ये प्रत्येक द्रव्य 4-4 तोला लेकर प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बनावे, पश्चात्‌…

  • Amritarnav Loh

    Post Views: 409 अमृतार्णव लौह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- यह रक्तशोधक, दीपक, पाचक और शक्ति-वर्धक है। इसके सेवन से सब प्रकार के कोढ़, वात-रक्त, अर्श (बवासीर) और उदर रोगों का नाश होता है। प्रकुपित वात जब रक्त दूषित कर देता है, तब शरीर में अनेक प्रकार के रोग उत्पन्न हो जाते हैं।…

  • Chyavanprash Special

    Post Views: 134 च्यवनप्राश ( स्पेशल ) गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इस स्पेशल च्यवनप्राश में पूर्वोक्त च्यवनप्राश के योग से अतिरिक्त मकरध्वज, अभ्रक भस्म, शृङ्गभस्म, शुक्ति भस्म, चाँदी के वर्क, केशर आदि विशिष्ट गुणकारी द्रव्यो को मिलाया जाता है, जिससे इनके गुणों में अत्यन्त वृद्धि हो जाती और यह शीघ्र लाभ भी…

  • Shothari Loh

    Post Views: 295 शोथारि लौह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- पाण्डु रोग युक्त-शोथ–पुराने पाण्डु-रोग में रस-रक्तादि धातु कमजोर होकर अपनी क्रिया करने में असमर्थ हो जाती है, तब शरीर में रक्‍ताणुओं का ह्रास और जल भाग की वृद्धि होती है। रक्तवाही शिराओं में जल प्रवेश कर जाता है, जिससे शिराएँ फूल जाती हैं।…