Rajparvartak Kashyam
रजःप्रवर्तक कषाय
गुण और उपयोग (Uses and Benefits)
- इस क्वाथ के उपयोग से अधिक दिनों का रुका हुआ मासिक धर्म भी खुलकर आने लगता है।
मात्रा और अनुपान (Dose and Anupan)– इसमें से । छटाँक क्वाथ प्रातः काल रजःप्वर्तनी बटी या योगराज गूगल के साथ दें, इसी तरह शाम को भी दें।
मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation) – अपामार्ग के बीज, मूली कें बीज, सोया के बीज, हंसराज, अमलतास का गूदा, +अजमोदा, वायविडंग, मंजीठ, कलौंजी–प्रत्येक 6-6 माशा, चित्रकमूल-छाल 4 माशा, गाजर के बीज । तोला, पुराना गुड (पाँच साल का) 2 तोला–इन सब को कूटकर रात को आधा सेर जल में भिंगो दें। प्रात: आग पर चढ़ा, क्वाथ कर लें। आधापाव जल शेष रहने पर, छान कर रख लें।