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  • Karshyehar Loh

    Post Views: 425 कार्श्यहर लौह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- यह बल-वीर्यवर्धक, अग्नि-दीपक, वृष्य और रसायन है। इसके सेवन से शरीर में स्फूर्ति व रक्त पैदा होता है तथा दुर्बलता, कमजोरी और रक्त की कमी दूर हो शरीर पुष्ट और बलवान हो जाता है। रस-रक्तादि धातुओं के क्षय हो जाने के कारण जो दुर्बल…

  • Varunadi Loh

    Post Views: 304 वरुणाद्य लौह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- अश्मरी (पथरी), मूत्रकृच्छु, सूजाक आदि रोगों में पेशाब न होने के कारण असह्य वेदना होती है और रोगी कश्ट से चिल्लाने लगता है। उस समय इस दवा के सेवन से लाभ होता हैं। इस दवा का असर मूत्राशय और मूत्र-नली तथा वृक्कों पर…

  • Jwarariabhar Ras

    Post Views: 19 ज्वरारि-अभ्र मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –   शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक, शुद्ध बच्छनाग, अभ्रक भस्म, ताम्र भस्म प्रत्येक 1-1 तोला, धतूर-बीज 2 तोला और त्रिकुटा 5 तोला लें। प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बना फिर कपड़छन किए हुए अन्य औषधियों के महीन चूर्ण को मिलाकर जल से घोंट…

  • Erend Pak

    Post Views: 155 एरण्ड पाक गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसके सेवन से लकवा, पंगुवात, आमवात, ऊरुस्तम्भ, शिरागत वायु, कटिवात, बस्तिवात, कोष्ठगतवात, वृषणवृद्धि, सूजन, उदरशूल, अपेण्डिसाइटिस आदि रोग नष्ट होते हैं। यह पाक सारक और वातनाशक दवाओं में अपना प्रधान स्थान रखता है। कमजोर मनुष्यों की शक्ति बढ़ाने के लिये इसकां सेवन करना…

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    Post Views: 95 शोथशार्दूल तैल गुण और उपयोग (Uses and Benefits): यह तैल वातज, कफज, पित्तज और सन्निपातज, सर्व देहगत भयंकर से भयंकर शोथ को भी नष्ट कर देता हैं। इसके अतिरिक्त यह ज्वर, पाण्डु, श्लीपद, घाव वाले व्रण, नाड़ी-व्रण, दुष्ट त्रण आदि रोगों का भी नाश करता हैं। मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main…