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    Post Views: 406 अमृतप्रभा बटी गुण और उपयोग (Uses and Benefits )– इस बटी का प्रयोग करने से समस्त प्रकार के अजीर्ण रोग समूल नष्ट होते हैं और प्रकूपित आम या कफ-दोष का पाचन कर जठराग्नि प्रदीप्त करती है। इसके अतिरिक्त अरुचि, आध्मान, ग्रहणी रोग, अर्श, पाण्डु रोग, शूल रोग और अन्य उदर रोगों को…

  • Jaymangal Ras

    Post Views: 22 जयमंगल रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  हिंगुलोत्थ, पारा, शुद्ध गन्धक, सुहागे की खील, ताम्र भस्म, बंग भस्म, सोनामक्खी भस्म, सेंधा नमक, काली मिर्च-प्रत्येक एक-एक तोला, स्वर्ण भस्म 2 तोला, कान्तलौह भस्म तथा चाँदी भस्म 1-1 तोला लें। प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बना फिर उसमें अन्य…

  • Aamvatari Ras

    Post Views: 34 आमवातारि रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –   शुद्ध पारा 1 तोला, शुद्ध गन्धक 2 तोला, त्रिफला 3 तोला, चित्रकमूल की छाल 4 तोला, शुद्ध गूगल 5 तोला लें। प्रथम पारा-गन्धक की कञज्जली बनावें। फिर अन्य दवाओं के चूर्ण तथा शुद्ध गूगल को मिलाकर बारीक पीस कर…

  • Chyavanprash

    Post Views: 393 च्यवनप्राशावलेह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- अग्नि और बल का विचार कर क्षीण पुरुष को इस रसायन का सेवन करना चाहिए। बालक, वृद्ध, क्षत-क्षीण, स्त्री-संभोग से क्षीण, शोषरोगी, हदय के रोगी और क्षीण स्वरवाले को इसके सेवन से काफी लाभ होता है। इसके सेवन से खाँसी, श्वास, प्यास, वातरक्त, छाती…

  • Baital Ras

    Post Views: 12 बेताल रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक, शुद्ध बच्छनाग, काली मिर्च, शुद्ध हरताल समान भाग लेकर प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बनावें, फिर उसमें अन्य औषधियों को मिलाकर सबको अच्छी तरह खरल करें। बाद में अदरक के रस में घोंटकर 1-1 रत्ती की…

  • Mrigank Ras

    Post Views: 10 मृगांक रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारा 1 तोला, शुद्ध गन्धक 2 तोला, मोती भस्म या षिष्टी 2 तोला, सुवर्ण भस्म 1 तोला, सुहागे की खील 3 माशे–इन सब चीजों को काँजी में घोंटकर गोला बना, सुखा, मुषा में बन्द करके एक घड़े में…