Narsingh Churan
नारसिह चूर्ण
मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि : शतावर ६४ तोला, छोटा गोखरू ६४ तोला, बाराहीकन्द ८० तोला, गिलोय १०० तोला, शुद्ध भिलावा १२८ तोला, चित्रकमूल की छाल ४० तोला, धोये हए तिल ६४ तोला, दालचीनी, तेजपात और छोटी इलायची–प्रत्येक ११-११ तोला, मिश्री २८० घ्य विदारीकन्द ६४ तोला लें, सब का एकत्र कट-कपड़छन चर्ण बनाकर शीशी में भर | –सि. यो. सं
मात्रा और अनुपान– ३ माशा से ६ माशा सुबह-शाम ६ माशे गाय का घी और ‘ तोला शहद मिलाकर दें, ऊपर से गाय का दध पिला दें।
गुण और उपयोग–
- यह चूर्ण उत्तम बाजीकरण, बलवर्द्धक और रसायन है इसके अतिरिक्त सब प्रकार के वात रोगों में भी इसका उपयोग किया जाता है।
- इसके सेवन काल में घी, दूध, चीनी आदि से बने स्निग्ध एवं पौष्टिक पदार्थों का भोजन करना चाहिए।
- यह रसरक्तादि धातुओं की वृद्धि कर शरीर में नयी स्फर्ति तथा बल, वर्ण और वीर्य की वृद्धि करता एवं कामशक्ति को बढ़ाता है।
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