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    Post Views: 333 धात्री रसायन गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- यह योग अत्यन्त पौष्टिक, वीर्यवर्धक, रसायन और उत्तम बाजीकरण है। यह आमाशय, मस्तिष्क, हृदय और आँतों को बलवान्‌ बनाता और जठराग्नि को प्रदीप्त करता है। विटामिन सी की कमी की अवस्था में इस औषध का सेवन विशेष उपयोगी है। इसके अतिरिक्त ज्वर, कास, श्वास,…

  • Garbhchintamani Ras

    Post Views: 26 गर्भ चिन्तामणि रस बृहत्‌ मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारद, शुद्ध गन्धक, स्वर्ण भस्म, लौह भस्म, रौप्य भस्म, स्वर्णमाक्षिक भस्म, शुद्ध हरिताल, बंग भस्म, अभ्रक भस्म–ये प्रत्येक द्रव्य 1 – 1 भाग लेकर प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बनावें, पश्चात्‌ अन्य सभी भस्मों को एकत्र मिला…

  • Vatraktantak Ras

    Post Views: 12 वातरक्तान्तक रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारा, गन्धक, लौह भस्म, अभ्रक भस्म, शुद्ध हरताल, शुद्ध मैनशिल, शुद्ध शिलाजीत, शुद्ध गुग्गुलु, वायविडङ्ग, हर्रे, बहेड़ा, आँवला, सोंठ, मिर्च, पीपल, बाकुची, पुनर्नवा की जड़, देवदारु, चित्रक, दारुहल्दी और सफेद कोयल (अपराजिता) की जड़-प्रत्येक समान भाग लेकर पारा-गन्धक…

  • Draksharist

    Post Views: 426 द्राक्षारिष्ट गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : यह भूख बढ़ाता, दस्त साफ लाता, कब्जियत को दूर करता, ताकत पैदा करता, नींद लाता, थकावट को दूर करता, दिल और दिमाग में ताजगी पदा करता तथा शरीर के प्रत्येक अङ्ग को ताकत देता है। कफ, खाँसी, सर्दी, जुकाम, हरारत, कमजोरी, क्षय, बेहोशी, आदि रोगों…

  • Amarsunderi Vati (Kasturi Yukat)

    Post Views: 26 अमरसुन्दरी बटी ( कस्तूरीयुक्त ) मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –   सोंठ, काली मिर्च, पीपल, हरड़, बहेड़ा, आँवला, सम्भालू के बीज, पीपलामूल, चित्रक मूल-छाल, लौह भस्म, दालचीनी, इलायची छोटी, तेजपात, नागकेशर, शुद्ध पारद, शुद्ध गन्धक, शुद्ध विष, वायविडंग, अकरकरा, नागरमोथा–प्रत्येक 1 -1 तोला और कस्तूरी 3…

  • Kaskuthar Ras

    Post Views: 26 कासकुठार रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध सिंगरफ, काली मिर्च, शुद्ध गन्धक, त्रिकुटा और सुहागे की खील प्रत्येक समभाग लेकर मर्दन कर रख लें। र. रा. सु. मात्रा और अनुपान  (Dose and Anupan)–  1-2 रत्ती, सुबह-शाम अदरकं रस और मधु के साथ दें। गुण और उपयोग…