Similar Posts

  • Benincasa Hispida

    Post Views: 7 कुष्माण्ड मूत्राघातहरं प्रमेहशमनं कृच्छाश्मरीच्छेदनं विण्मूत्रग्लपनं तृषात्तिशमनं जीर्णाङ्गपुष्टिप्रदम्‌ । वृष्यं स्वादुतरं त्वरोचकहरं बल्यं च पित्तापहं कुष्माण्डं प्रवरं वदन्ति भिषजो वल्लीफलानां पुनः ॥१६१॥ गुण और कर्म (medicinal properties and uses) :- कुष्माण्ड ( कुम्हड़ा ) मूत्रघात को दूर करने वाला, प्रमेह-शामक, मूत्रकृच्छु तथा पथरी छेदन करने वाला, मलमूत्र निकालने वाला, प्यास की पीड़ा को…

  • Convolvulus Pluricaulis

    Post Views: 11 शङ्खपुष्पी शङ्खपुष्पी हिमा तिक्ता मेधाकत्‌ स्वरकारिणी । प्रहभूतादिदोषध्नी वशीकरणसिद्धिदा ॥ १३३ ॥ R.N गुण और कर्म (medicinal properties and uses) :- शङ्खपुष्पी, शीतवीर्यं तिक्तरसयुक्त मेधाकारक तथा स्वर ठीक करने वाली है यह ग्रह, भूत आदि दोषों को नाश करने वाली है तथा वशीकरण सिद्धि को देने वाली है। औषधीय गुण ( Medicinal…

  • Hydrocotyle asiatica

    Post Views: 10 ब्राह्मी ब्राह्मी हिमा कषाया च तिक्ता वातास्रपित्तजित । बुद्ध प्रज्ञां च मेधां च कुर्य्यादायुष्यबद्धेनी ।। ६६ ॥  रा.नि. ब्राह्मी के गुण और कर्म (medicinal properties and uses) :- ब्राह्मी शीतवीर्य , कषाय रस, विपाक में तिक्त है। वातरक्त तथा पित्तविकार को शान्त करती है। यह बुद्धि, प्रज्ञाशक्ति एवं मेधाशक्ति को देती है…

  • Papaver somniferum

    Post Views: 3 अहिफेन ( अफीम )  अफेन खस्खसरसो निफेनं चाहिफेनकम्‌। अफेनं सन्निपातघ्नं वृष्यं बल्यं च मोहदम्‌ ।। २३४ ॥ गुण और कर्म (medicinal properties and uses) :- अहिफेन खस्खसरस, निफेन तथा अहिफेनक ये सब अहिफेनं ( अफीम ) के नाम है। अफीम सन्निपातनाशक, वीर्यवरद्धक, बलकारक तथा मोह में डालने वाला ( नशीला ) होता…

  • Acorus calamus

    Post Views: 3 वच ( घोड़ बच ) वचा तीक्ष्णा कदृष्णा चकफामग्रन्थिशोफनुत्‌ | बातज्वरातिसारघ्नी वान्तिकृन्मादभुतनुत्‌॥ ५२॥ RN गुण और कर्म (medicinal properties and uses) :- वच तीक्ष्ण, उष्णवीर्य तथा कटु रस वाली है, और कफविकार, आमदोष तथा ग्रन्थि शोथ ( गांठों की शोथ ) को दूर करती है। यह वात-ज्वर तथा अतिसार को नाश करने…

  • Nordostachys Jatamans

    Post Views: 4 जटामांसी सुरभिस्तु जटामांसी कषाया कटुशीतला । कफहृदूभूतनदाहघ्नी पित्तघ्नी मोदकान्तिकृत्‌ ॥ ९५॥ RN गुण और कर्म (medicinal properties and uses) :- जटामांसी सुगन्धित, कषाय तथा कटु रस वाली एवं शीतल और यह कफज विकार को दुर करने वाली, भूत बाधा तथा दाह एवं पित्तजविकार को नाश करने वाली व सुगन्ध एवं कान्ति को…