Similar Posts

  • Puranchander Ras

    Post Views: 13 पूर्णचन्द्र रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  रससिन्दूर, अभ्रक भस्म, लौह भस्म, शुद्ध शिलाजीत, वायविडंग, स्वर्णमाक्षिक भस्म-प्रत्येक समान भाग लेकर इन्हें घृत और मधु में खरल करके 2-2 रत्ती की गोलियाँ बना लें। वक्तव्य: मधु और घृत के योग से बनी गोलियाँ सूखती नहीं हैं। अतः…

  • Chanderkant Ras

    Post Views: 26 चन्द्रकान्त रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  रससिन्दूर, अभ्रक भस्म, तीक्ष्ण लौह भस्म, ताम्र भस्म, शुद्ध गन्धक–सब समान भाग लेकर एक दिन स्नुही (सेहुण्ड) के दूध में घोंटकर 2-2 रत्ती की गोलियाँ बना, सुखा कर रख लें। र. सा. सं. मात्रा और अनुपान  (Dose and Anupan)– …

  • Shilajitavadi Loh

    Post Views: 277 शिलाजत्वादि लौह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इस लौह का उपयोग करने से समस्त प्रकार के राजयक्ष्मा रोग नष्ट होते हैं और रक्त क्षय, रक्ताल्पता (एनीमिया), जीर्णज्चर, पाण्डुरोग, रक्तपित्त, क्षय, काम, प्रमेह इनको नष्ट करता है। शरीर में रक्ताणुओं की वृद्धि कर नवीन रक्त को उत्पन्न करता है। बल, वर्ण…

  • Saptamrit Loh

    Post Views: 318 सप्तामृत लौह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- यह सब प्रकार के नेत्र-रोगों की खास दवा है। इसके सेवन स दृष्टि-शक्ति की कमी, आँखों की लाली, आंखों में खाज होना, आँखों के आगे अन्धेरा होना आदि विकार और नेत्र रोग अच्छे हो जाते हैं। इससे दस्त साफ -आता एंव, अग्नि (जठराग्नि)…

  • Dashmool Kwath

    Post Views: 36 दशमूल क्वाथ गुण और उपयोग (Uses and Benefits) इस क्वाथ का उपयोग वात और कफ-सम्बन्धी विकारों में विशेष होता है। प्रसूत रोग के लिए यह क्वाथ प्रसिद्ध है। वात प्रकोप में भी अनुपान रूप से इसका प्रयोग किया जाता है। मुँह सूखना, हाथ-पाँव आदि अवयव ठंडे पड़ जाना, चक्कर आना, पसीना अधिक…

  • Dhanye Panchak Kwath

    Post Views: 34 धान्यपंचक क्वाथ गुण और उपयोग (Uses and Benefits) यह क्वाथ उत्तमं दीपन-पाचन और ग्राही है। अतिसार में इसका उपयोग विशेष होता है। पित्तातिसार या रक्तातिसार में इसका उपयोग करना हो, तो सोंठ की जगह सौंफ डाल कर इसका प्रयोग करें। इस क्वाथ का अकेला या महागंधक रसायन, पीयूषबल्ली रस आदिं दवाओं के…