Mahasugandhit Tel
महासुगन्धित तैल
गुण और उपयोग (Uses and Benefits):
- जिसके मस्तक में आधाशीशी का दर्द होता है, उसको सीधा लेटा कर गर्दन के नीचे तकिया लगाकर, मस्तक को तकिये के पीछे झुका दें, जिसंसे नाक के छेद आसमान की हरफ हो जायें, फिर 2-2 बूँद नासिका में यह तैल डालें और जोर से ऊपर को खींचने के लिए रोगी से कहें, जिससे तैल मस्तक में चढ़ जाय।
- एक-दो बार डालने में ही दो-चार दिन में आधाशीशी का दर्द दूर हो जाता है।
- यह तैल इतना सुगन्धित है कि सिर में डालते ही इसकी खुशबू चारों तरफ फैल जाती है।
- इसको माथे में लगाने से गर्मी के कारण होने वाले सिर दर्द, दिमाग की गरमी, बेचैनी, ज्यादा गरमी लगना, माथा बराबर गर्म रहना आदि दूर हो जाते हैं।
मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation): – युकेलिप्टस ऑयल (नीलगिरी का तैल) 2 तोला, कपूर 2 तोला, सन्तरे का रूह (तैल) 2 तोला लें। इन तीनों को बोतल में भर कर डाट लगा दें। एक घण्टे में तीनों चीजें मिल कर तैल हो जायेगा। फिर सफेद तिल का तेल 80 तोला भी इसी बोतल में डालकर डाट लगा कर रख देने से एक घण्टे में यह सुगन्धित तैल तैयार हो जाता है।
–ध. से किंचित् परिवर्तित
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