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  • Kamdev Churan

    Post Views: 347 कामदेव चूर्ण मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि: कोंच की गिरी 1 तोला, सफेद मूसली 2 तोला, मंखाने की ठुड्डी (छिलका-रहित) 4 तोला, तालमखाना 4 तोला, मिश्री 5 तोला -सब का महीन चूर्ण कर मिश्री मिला कर काम में लावें । मात्रा और अनुपान: 3 से 6 माशा सुबह-शाम गाय के दूध के…

  • Lai Churan

    Post Views: 307 लाई चूर्ण गुण और उपयोग (Uses and Benifits )— इस चूर्ण के सेवन से संग्रहणी, शूल, अफरा ओर अतिसार का नाश हाता तथा मर्न्दाग्न दूर हाती ह ओर पाचन शक्ति बढ़ता है। संग्रहणी की प्रारम्भिक अवस्था मे इसक उपयोग से बहुत लाभ होता है। यह पाचक पित्त को उत्तजित कर पाचन क्रिया…

  • Panchsakar Churan

    Post Views: 435 पंचसकार चूर्ण (विरेचक) मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि :  सनाय की पत्ती ४ भाग, सोंठ, सौंफ, सेन्धा नमक १-१ भाग और शिवा (घी या एरण्ड तैल में लगाकर सेंकी हुई जौ-हरड़) २ भाग लेकर कूट-कपड़छन कर चूर्ण बनावें। –सि. यो. सं. मात्रा और अनुपान– २३ से ६ माशे तक अकेला या इसमें…

  • Mahasudarshan Churan

    Post Views: 311 महासुदर्शन चूर्ण गुण और उपयोग– यह चूर्ण निस्सन्देह समस्त ज्वरों को नष्ट करने वाला है। इसके सेवन से एक-दोषज, द्विदोषज, आगन्तुक और विषम ज्वर एवं सन्निपात ज्वर, मानसिक दोषों से उत्पन्न ज्वर, पारी से आने वाला ज्वर, प्राकृतिक ज्वर, वैकृतिक ज्वर, सूक्ष्म रूप से रहने वाला ज्वर, अन्तर्दाह (शरीर के बाहर दाह…

  • Sukhvirechan Churan

    Post Views: 297 सुखविरेचन चूर्ण गुण और उपयोग (Uses and Benifits ) – यह चूर्ण मृदु विरेचक और उत्तम औषध है। इस चूर्ण के सेवन करने से एक-दो दस्त खुलकर साफ हो जाते हैं और कब्जियत को यह शीघ्र नष्ट करता हे। इसके सेवन से उदर या आंतों मे किसी प्रकार की जलन या विकार…