Lvangabhar Ras
लवंगाभ्रक रस
मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation) – लौंग, अतीस, नागरमोथा, पाठा (पाढ़), बेलगिरि, धनियाँ, धाय के फूल, मोचरस जीरा, लोध, इन्द्रजौ, खस, राल, काकड़ासिंगी, सेन्धा नमक, सोंठ, पीपल, खरैंटीमूल-छाल, यवक्षार, शुद्ध अफीम, रसौत–प्रत्येक 1-1 भाग, अभ्रक भस्म 5 भाग, लौंग सब द्रव्यो के बराबर अर्थात् 26 भाग लेकर प्रथम चूर्ण करने योग्य द्रव्यों का सूक्ष्म कपड़छन चूर्ण करें। पश्चात् उसमें यवक्षार, अफीम, अभ्रक भस्म आदि द्रव्य मिलाकर नागरमोथा के क्वाथ की भावना देकर दृढ़ मर्दन करें। गोली बनने योग्य होने पर 2-2 रत्ती की गोलियाँ बना, सुरक्षित रख लें।
मात्रा और अनुपान (Dose and Anupan)– 1-2 गोली दिन में 3-4 बार जल के साथ रोगानुसार उचित्त अनुपान के साथ दें।
गुण और उपयोग (Uses and Benefits) :
- इस रसायन का प्रयोग करने से समस्त प्रकार के अतिसार रोग नष्ट होते हैं।
- इसके अतिरिक्त चिरकालिक ग्रहणी रोग, अग्निमांद्य, प्रवाहिका और अम्लपित्त रोग को नष्ट करता है।
- यह रसायन उत्तम ग्राही, दीपक, पाचक और स्तम्भक है तथा शो्थयुक्त ग्रहणी रोग, पाण्डु कामला इनको भी नष्ट करता है।
- आमातिसार और प्रवाहिका में धान्यपंचक क्वाथ के साथ देने से तथा पक्वातिसार में जायफल घिसकर पानी में मिला उसके साथ देने से उत्तम लाभ होता है।
- ग्रहणी रोग में भुवनेश्वर रस और शंख भस्म के साथ उपयोग करने से श्रेष्ठ उपकार होता है, अम्लपित्त में दाड़िमावलेह या आंवले के मुरब्बा के साथ देना उपयोगी है।
This content is for informational purposes only. Always consult a certified medical professional before using any medicines.
Book Your Online Consultation