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    Post Views: 26 अजीर्णकण्टक रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  सुहागे की खील, पीपल, शुद्ध बच्छनाग औरं हिंगुल 1-1 तोला, काली मिर्च 2 तोला । सब चीजों को एकत्र कर कूटंने वाली दवा को कूट कर कपड़छन कर लें, फिर इसमें सिंगरफ और सुहागे की खील मिला जम्बीरी नींबू…

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  • Guduchiadi Tel

    Post Views: 99 गुडूच्यादि तैल गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : इस तेल की मालिश करने से वातरक्त, तिमिर रोग, कुष्ठरोग, त्वचा के विकार, विसर्प, पसीना अधिक आना, खुजली और दाह आदि रोग नष्ट होते हैं। मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation): –  मूर्च्छित तिल तेल 28 तोला, गिलोय का…

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    Post Views: 175 श्रीखंडासव गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : इसके सेवन से मद्यजनित रोग यथा–पानात्यय, पानविभ्रम, पानाजीर्ण आदि रोग दूर होते हैं। पैत्तिक (पित्तजन्य) रोगों में इसका विशेष उपयोग किया जाता है। रक्तपित्त, प्यास कीं अधिकता, बाह्यदाह और अन्तर्दाह, रक्तदोष, मूत्रकृच्छू, मूत्राघात, शुक्रदोष आदि विकारों में भी यह उत्तम लाभदायक है। मात्रा और अनुपान …

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    Post Views: 13 रत्नगिरि रस ( साधारण ) मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध मैनशिल, शुद्ध टंकण, शुद्ध हिंगुल, जायफल, लौंग–ये प्रत्येक द्रव्य 1-1 भाग लेकर प्रथम चूर्ण करने योग्य द्रव्यों का सूक्ष्म कपड़छन चूर्ण करें। पश्चात्‌ समस्त द्रव्यों को एकत्र मिला तुलसी-पत्र-स्वरस, अदरख-स्वरस और हुलहुल के स्वरस की…