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    Post Views: 14 लक्ष्मीनारायण रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध हिंगुल, शुद्ध गन्धक, शुद्ध बच्छनाग, सुहागे की खील, कुटकी, अतीस, पीपल, इन्द्रजौ, अभ्रक भस्म, सेन्धा नमक–प्रत्येक समभाग लेकर सबको एकत्र खरल करके दन्तीमूल और त्रिफला के रस में पृथक्‌-पृथक्‌ 3-3 दिन घोंट कर 2-2 रत्ती की गोलियाँ बना…

  • Mrigank Ras

    Post Views: 19 मृगांक रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारा 1 तोला, शुद्ध गन्धक 2 तोला, मोती भस्म या षिष्टी 2 तोला, सुवर्ण भस्म 1 तोला, सुहागे की खील 3 माशे–इन सब चीजों को काँजी में घोंटकर गोला बना, सुखा, मुषा में बन्द करके एक घड़े में…

  • Kaphkuthar Ras

    Post Views: 37 कफकुठार रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –   शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक, सोंठ, पीपल, कालीमिर्च, लौह भस्म, ताम्रभस्म सब बराबर लेकर, प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बनावे, फिर लौहभस्म और ताम्रभस्म को मिलायें तथा काष्ठौषधियों को कूट-कपड़छन चूर्ण कर कज्जली के साथ मिला छोटी-छोटी कटेली के फलों…

  • Sudhanidhi Ras (Soth)

    Post Views: 12 सुधानिधि रस ( शोथ ) मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation): –  मण्डूर भस्म 10 तोला, धनियाँ, सुगन्धबाला, नागरमोथा, सोंठ और सेंधानमक का चूर्ण 1-1 तोला ले प्रथम काष्ठौषधियों का महीन चूर्ण कर फिर मण्डूर भस्म के साथ मिलाकर गोमूत्र, भांगरा, पुनर्नवा, काला भांगरा, संभालू और मण्डूकपर्णी इनके…

  • Eladiarist

    Post Views: 201 एलाद्घरिष्ट गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इस अरिष्ट का सेवन करने से विसर्प, मसूरिका (चेचक), रोमान्तिका, शीतपित्त, विस्फोट (फोड़े), विषमज्वर, नाड़ी व्रण (नासूर), दुष्टब्रण, दारुण कास, श्वास, भगन्दर, उपदंश और प्रमेह पीड़िका रोग आदि समूल नष्ट होते हैं। यह अरिष्ट शीत-वीर्य, मूत्रल, दीपन, पाचन, रक्त-प्रसादन, विषघ्न और बल्य है। इसके प्रभोग…

  • Madananand Modak

    Post Views: 401 मदनानन्द मोदक गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इससे बल-वीर्य की वृद्धि, रति-शक्ति की वृद्धि और स्तम्भन शक्ति प्राप्त होती है। यह संग्रहणी और मन्दाग्नि की उत्तम दवा है। सत्री-सम्भोग के लिये सायंकाल इसका सेवन दूध के साथ करना चाहिए। आयुर्वेद के आचार्यो का मत है कि लगातार तीन सप्ताह तक…