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    Post Views: 664 तालिसादि चूर्ण: मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि:  तालीसपत्र 1 तोला, कालीमिर्च 2 तोला, सोंठ 3 तोला, पीपल 4 तोला, बंशलोचन 2 तोला, छोटी इलायची और दालचीनी 6-6 माशा लें-इन सबका महीन चूर्ण कर फिर इसमें 32 तोला मिश्री या चीनी पीसकर मिला कर रख लें। मात्रा और अनुपान: 2 से 3 माशे…

  • Chitrakadi Churan

    Post Views: 282 चित्रकादि चूर्ण मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि: चीता, पीपलामूल, पीपल, गजपीपल, हींग, पुष्करमूल, अनारदाना, कालाजीरा, वायविडंग, धनिया, हाऊबेर, सोया, हिंगुपत्री, चव्य, अम्लवेत, जीरा, अजवायन, कचूर, बच, तुम्बुरू, (नेपाली धनियाँ), अजमोद, अजवायन और काला नमक- प्रत्येक समान भाग तथा सब के बराबर सोंठ लेकर महीन चूर्ण करके बिजोरे नींबू के रस में घोंट…

  • Pushyanug Churan

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  • Krimighan Churan

    Post Views: 199 कृमिघ्न चूर्ण मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि: ढाक (पलास) के बीज, कुटज (कुडा) की छाल-प्रत्येक एक-एक छटाँक, वायविडंग आधा पाव। इन तीनों को एकत्र कूट-छान चूर्ण बना कर रख लें। मात्रा और अनुपान 3-6 माशा सुबह-शाम गर्म जल के साथ दें। गुण और उपयोग – रसा. सा. इस चूर्ण के सेवन करने…

  • Lavangadi Churan

    Post Views: 290 लवंगादि चूर्ण  गुण और उपयोग (Uses and Benifits )—— यह चूर्ण रुचि उत्पन्नकारक, अग्निप्रदपक, बलकारक, पौष्टिक ओर त्रिदोष-नाशक है तथा छाती की धड़कन, तमकश्वास, गलग्रह, खाँसी, हिचकी, यक्ष्मा, पीनस, ग्रहणी, अतिसार और प्रमेह को शीघ्र नष्ट करता है। अधिक दिनों तक ज्वर आकर छूटने के बाद जो कमजोरी रहती है, उसमें किसी…

  • Dashang Lep

    Post Views: 319 दशांगलेप मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि : सिरस की छाल, मुलेठी, तगर, लालचन्दन, इलायची, जटामांसी, हल्दी, दारुहल्दी, कठ, नेत्रवाला, खस-१-१ भाग लेकर कूट कपड़छन चूर्ण करें –भै.र. लेप विि–इस चूर्ण को जल के साथ पीसकर चूर्ण से पाँचवाँ भाग गोघ॒त मिलाकर लेप करें। शु गुण और उपयोग– रूग्ण स्थान पर इस लेप…