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    Post Views: 276 लवण भास्कर चूर्ण गुण  और उपयोग– इसके सेवन से  मन्दाग्नि , अजीर्ण, वातकफज गुल्म, तिल्ली उदर रोग , क्षय, अर्श. ग्रहणी रोग, कुष्ठ, शूल, आम-विकार आदि रोग नष्ट होता हैं। यह चूर्ण खाने में बहुत स्वादिष्ट  और अत्यन्त लाभकारी भी हे। रोज़ाना के भोजन  के बाद याद इस चूर्ण का सेवन किया जाय…

  • Lavangadi Churan

    Post Views: 305 लवंगादि चूर्ण  गुण और उपयोग (Uses and Benifits )—— यह चूर्ण रुचि उत्पन्नकारक, अग्निप्रदपक, बलकारक, पौष्टिक ओर त्रिदोष-नाशक है तथा छाती की धड़कन, तमकश्वास, गलग्रह, खाँसी, हिचकी, यक्ष्मा, पीनस, ग्रहणी, अतिसार और प्रमेह को शीघ्र नष्ट करता है। अधिक दिनों तक ज्वर आकर छूटने के बाद जो कमजोरी रहती है, उसमें किसी…

  • Tikshan Virachan Churan

    Post Views: 238 तीक्ष्णविरेचन चूर्ण मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि:  इद्रायण की जड़ 1 तोला, निशोथ 2 तोला, कालादाना भूना 2 तोला, सनाय की पत्ती 2 तोला, हरड़ का छिलका 1 तोला, कालानमक 1 तोला लेकर समस्त द्रव्यों को एकत्र मिला, कूटकर सूक्ष्म चूर्ण करें। मात्रा और अनुपान 1 ।। माशे से 6 माशे तक…

  • Bilvadi Churan

    Post Views: 194 बिल्वादि चूर्ण   गुण और उपयोग– यह चूर्ण उत्तम-पाचन और ग्राही है। अतिसार में इस चर्ण को अकेले ही या रस-पर्पटी के साथ मिलाकर देने से उत्तम लाभ होता है, प्रवाहिका (पेचिश-मरोड़ के साथ आँव और रकर्तामश्चित दस्त आना) में समभाग घी या एरण्ड तैल लगाकर सेंकी हुई छोटी हरड़ का चूर्ण…

  • Sarswat Churan

    Post Views: 306 सारस्वत चूर्ण गुण और उपयोग (Uses and Benifits )— उन्माद, अपस्मार, मस्तिष्क की कमजोरी, स्मरणशक्ति की हीनता आदि में इसका उपयोग किया जाता है। मात्रा और अनुपान  (Dose and Anupan) —: 2 से 4 माशे, सुबह-शाम घृत और शहद के साथ दें। मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of…

  • Gokshuradi Churan

    Post Views: 160 गोक्षुरादि चूर्ण मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि: गोखरू, तालमखाना, शतावर, कोंच के बीज, नागबला और अतिबला-प्रत्येक दवा समान भाग लेकर कूट-छान चूर्ण बना लें। मात्रा और अनुपान: 2 से 3 माशा तक सुबह-शाम अथवा रात को सोते समय । गुण और उपयोग —यो. त. यह चूर्ण वृष्य, बल-वीर्य-वर्द्धक और कामोत्तेजक है। शुक्र…