Similar Posts

  • Gandhak Pisti Tel

    Post Views: 95 गन्धकपिष्टी तैल गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : इस तेल के उपयोग से नयी-पुरानी खुजली, चाहे वह सूखी हो या गीली, कुछ दिनों तक धूप में बैठकर मालिश करने तथा बाद में नीम के साबुन लगा कर स्नान करने से चली जाती है। इसके साथ शुद्ध गन्धंक 2 रत्ती बराबर मिश्री मिलाकर…

  • Ashavgandhadi Ghrit

    Post Views: 299 अशवगन्धादि घृत गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : इस घृत के उपयोग से संमस्त प्रकार के वात रोग, सन्धि-शूल (जोड़ों का दर्द), कमर का दर्द, किसी भी अङ्ग में आई हुई अशक्तता, भ्रम (चक्कर आना), अनिद्रा आदि विकार नष्ट होते हैं। यह स्नायुमण्डल को अपूर्व शक्ति प्रदान करता है तथा रस-रक्तादि धातुओं…

  • Mahabhrigraj Tel

    Post Views: 268 महाभृंगराज तैल गुण और उपयोग (Uses and Benefits): इस तैल को सिर में लगाने से बालों का असमय में झड़ना और सफेद होना ये दोनों विकार नष्ट होते हैं। इसके अतिरिक्त शिरो रोग, मन्यास्तम्भ (Cervical Pain), गल-ग्रह, कान तथा आँख के रोगों में नस्य लेने तथा मालिश करने से उत्तम लाभ करता…

  • Raktpitantak Loh

    Post Views: 254 रक्तपित्तान्तक लौह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसके सेवन से रक्तपित्त और अम्लपित्त दोनों ही रोग नष्ट होते हैं। रक्तपित्त के लिए यह बहुत प्रसिद्ध दवा है। रक्तपित्त में–रक्त ज्यादा निकल जाने के कारण शरीर का रङ्ग पीला हो जाता है, हृदय कमजोर एवं नाड़ी की गति क्षीण, मन्दाग्नि, प्यास ज्यादा…

  • Laghumalini Basant

    Post Views: 3 लघुमालिनी वसन्त मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  खर्पर भस्म, (अभाव में यशद भस्म) 5 तोला, सफेद मिर्च का चूर्ण 2 तोला, शुद्ध हिंगुल 5 तोला लेकर सबको एकत्र मिला गो-दुग्ध से निकाले हुए 2 तोला मक्खन के साथ खरल में डालकर मर्दन करें, फिर 100 नींबू…

  • Shankhodar Ras

    Post Views: 1 शंखोदर रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शंख भस्म 4 तोला, शुद्ध अफीम 1 तोला, जायफल और सुहागे की खील 1-1 तोला लेकर सबको एकत्र मिला अत्यन्त बारीक खरल करके रख लें, अथवा जल के साथ मर्दन कर 1-1 रत्ती की गोलियाँ बना, सुखाकर सुरक्षित रख…