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    Post Views: 331 बाकचिकाद्य चूर्ण गुण और उपयोग — यह चूर्ण रक्तशो धक, विरेचक आर कृष्ठघ्न है। इसके सेवन से रफ्त-विकार, कष्ट, वातरक्त, शरीर पर होने वाली छोटी-छोटी फंसियाँ आदि विकार नप्ट हा जात है। मात्रा और अनुपान–२ से४ माशा तक गुर्च (गिलोय ) के क्वाथ या जल के साथ दें। मुख्य सामग्री तथा बनाने…

  • Balchaturbhadar Churan

    Post Views: 631 बालचातुभद्र चूर्ण गुण और उपयोग– इस चर्ण के सेवन से बच्चों के ज्वर, अतिसार, खाँसी और वमन आदि रोग नष्ट होते हैं। यह चूणं बच्चों की बीमारी के लिये बहुत प्रसिद्ध है। सर्वसाधारण में यह चौहद्दी, चौमजी,चटनी आंद नामों से प्रसिद्ध हैं। यह दवा बच्चों के लिये अमृत के समान गुण करती…

  • Narsingh Churan

    Post Views: 331 नारसिह चूर्ण मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि : शतावर ६४ तोला, छोटा गोखरू ६४ तोला, बाराहीकन्द ८० तोला, गिलोय १०० तोला, शुद्ध भिलावा १२८ तोला, चित्रकमूल की छाल ४० तोला, धोये हए तिल ६४ तोला, दालचीनी, तेजपात और छोटी इलायची–प्रत्येक ११-११ तोला, मिश्री २८० घ्य विदारीकन्द ६४ तोला लें, सब का एकत्र…

  • Kumkumadi Churan

    Post Views: 264 कुंकुमादि चूर्ण मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि: केशर, कस्तूरी, नागरमोथा, तेजपात, दालचीनी, इलायची, नागकेशर, त्रिफला, अकरकरा, धनियाँ, अनारदाना, काली मिर्च, पीपल, अजवायन, तिन्तड़ीक, हींग, कपूर, तुम्बरू (नेपाली धनियाँ), तगर, सुगन्धवाला, लौंग, जावित्री, मंजीठ, पुष्करमूल, प्रियंगु, कमलगट्टा, बंशलोचन, कपूरकचरी, तालीसपत्र, चीता, जटामांसी, जायफल, खस, खरेटी, नागबला, कूठ, पीपलामूल, अभ्रक भस्म, रौप्यमाक्षिक और स्वर्णमाक्षिक…

  • Bilva Phaladi Churan

    Post Views: 179 बिल्वफलादि चर्ण गुण और उपयोग– यह चर्ण संग्राही हे अथांत्‌ पतले दस्त को रोकता तथा आँतां को बलवान बनाता है। इस चर्ण क सेवन से आम और खनयक्त संग्रहणी नष्ट हो जाती है। संग्रहणी की पुरानी अवस्था में–आँतों में खराश हो जाती अर्थात्‌ आँतें छिल जाती हैं, जिससे दस्त के समय थोड़ा-सा…

  • Vyoshadi Churan

    Post Views: 169 व्योषादि चर्ण गुण और उपयोग– यह चूर्ण पाचन आर ग्राही (दस्त को रोकने वाला) हैं। इसके सवन से प्यास, अर्साच, ज्वरातिसार, प्रमह, संग्रहणी, गुल्म. प्लीहा, कामला, पाण्ड आर शाथ का नाश हाता है। मात्रा और अनुपान–३ से ६ माशा तक सुबह-शाम, शहद के साथ चाटकर ऊपर से चावला का पानी पीना चाहिए।…