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    Post Views: 319 कर्पूरादि चूर्ण मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि: कपूर, दालचीनी, कंकोल, जायफल, तेजपत्ता – प्रत्येक 1-1 तोला, लौंग 1 तोला, जटामांसी 2 तोला, कालीमिर्च 3 तोला, पीपल 4 तोला, सोंठ 5 तोला और मिश्री या चीनी सब दवा के बराबर लेकर यथाविधि चूर्ण बना लें। वक्तव्य योगरत्नाकर में जटामांसी के स्थान पर नागकेशर…

  • Yavksharadi Churan

    Post Views: 320 यवक्षारादि चूर्ण गुण और उपयोग— कभी-कभी गर्मी ज्यादा बढ़ जाने से पेशाब में विकृति आ जाती है, जैसे-पेशाब खुल कर न होना, बँद-बँद होना, जलन और दर्द के साथ पेशाब लाल या अधिक पीला होना आदि। ऐसी हालत में यह चर्ण देने से बहुत लाभ करता हे । यवक्षार का प्रभाव मूत्रपिण्ड…

  • Vyoshadi Churan

    Post Views: 162 व्योषादि चर्ण गुण और उपयोग– यह चूर्ण पाचन आर ग्राही (दस्त को रोकने वाला) हैं। इसके सवन से प्यास, अर्साच, ज्वरातिसार, प्रमह, संग्रहणी, गुल्म. प्लीहा, कामला, पाण्ड आर शाथ का नाश हाता है। मात्रा और अनुपान–३ से ६ माशा तक सुबह-शाम, शहद के साथ चाटकर ऊपर से चावला का पानी पीना चाहिए।…

  • Bilvadi Churan

    Post Views: 191 बिल्वादि चूर्ण   गुण और उपयोग– यह चूर्ण उत्तम-पाचन और ग्राही है। अतिसार में इस चर्ण को अकेले ही या रस-पर्पटी के साथ मिलाकर देने से उत्तम लाभ होता है, प्रवाहिका (पेचिश-मरोड़ के साथ आँव और रकर्तामश्चित दस्त आना) में समभाग घी या एरण्ड तैल लगाकर सेंकी हुई छोटी हरड़ का चूर्ण…

  • Shaddharan Churan

    Post Views: 410 षड्धरण चूर्ण गुण और उपयोग (Uses and Benifits )— गैस, सूजन, अपच और कब्ज सहित कई तरह की पाचन समस्याओं के इलाज में मदद करता है। षड्धरण चूर्ण आमवात की शिकायतों और अन्य जोड़ों के विकारों के इलाज में उपयोगी है। त्वचा रोगों, पित्त की पथरी और मोटापे के इलाज में फायदेमंद…

  • Manjisthadi Churan

    Post Views: 182 माञ्जिष्ठादि चूर्ण गुणऔर उपयोग– यह  चूर्ण दस्त और पेशाब साफ  लाने वाला और शोधक  है। मल-मूत्र की रुकावट, अर्श (बवासीर) और रक्त-विकार में इसके प्रयोग से विशेष लाभ होता हैं। पित्त प्रकति तथा रक्त और पित्त क विकारों म इसका प्रयाग बहुत लाभदायक हैं। मात्रा और अनुपान– ४ से ६ माशो, प्रातःकाल…