Devdarviadi Kwath
देवदार्वादि क्वाथ
गुण और उपयोग (Uses and Benefits)
- देवदार्वादि क्वाथ प्रसूत ज्वर में उत्तम है।
- इसका केवल या “बृहत्कस्तूरी भैरव” के अनुपानरूप में प्रयोग करें।
- इससे शूल, खाँसी, श्वास, मूच्छां, कम्प, सिर का दर्द और तन्द्राप्रलाप आदि उपद्रवयुक्त सूतिका ज्वर दूर हो जाता है।
- यदि प्रलाप हो, तो इस क्वाथ में लौंग, ब्राह्मी, जटामांसी, तगर, खुरासानी अजवायन 1-1 माशा और मिलावें।
- प्रसूता स्री को प्रसव के दिन से ही देवदार्वादि क्वाथ और दशमूल क्वाथ दोनों मिलाकर देने से प्रायः सूतिका रोग होने का डर नहीं रहता।
मात्रा और अनुपान (Dose and Anupan)– इसमें से 1 तोला चूर्ण लेकर 16 तोला जल में पकावें। 4 तोला जल शेष रहने पर उतार छान करके, प्रसूता स्री को पिलावें।
मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation) – देवदारु, बच, कूठ, पीपल, सोंठ, कायफल की छाल, नागरमोथा, चिरायता, कुटकी, धनिया, हरड़, गज. पीपल, जवासा, गोखरू, धमासा, बड़ी कटेरी, अतीस, गिलोय, काकड़ासिंगी और स्याहजीरा–ये सब द्रव्य समभाग लेकर दरदरा कूट कर रख लें। –शा. ध. सं,
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