Similar Posts

  • Dhaniyepanchakarist

    Post Views: 176 धान्यपंचकारिष्ट गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : यह अरिष्ट उत्कृष्ट दीपन, पाचन और ग्राही है। इसका प्रयोग करने से अतिसार, प्रवाहिका और संग्रहणी रोग नष्ट होते हैं। अर्क सौंफ 5 तोला मिला कर पिलाने से यह पित्तातिसार और रक्तातिसार में अच्छा लाभ करता है। वक्तव्य : यह धान्यपंचक क्वाथ का योग है।…

  • Vidangadi Loh

    Post Views: 222 विडंगादि लौह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसके सेवन से उदर-कृमि, अर्श-अरुचि, मन्दाग्नि, विसूचिका (हैजा), शोथ, शूल, ज्वर, हिक्का, कास और श्वास का नाश होता है। कृमि रोग में इसका विशेषतया उपयोग किया जाता है। कृमिरोग में लम्बे, गोल, मूत्राकार, चपटे आदि अनेक प्रकार के कृमि आंतों में चिपके रहते…

  • Shankar Loh

    Post Views: 303 शंकर लौह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- यह रसायन वात-पित्त, कुष्ठ, विषमज्वर, गुल्म, नेत्ररोग, पाण्डु रोग, अधिक निद्रा, आलस्य, अरुचि, शूल, परिणामशूल, प्रमेह, अपबाध्य, शोथ, विशेषतया रक्तस्राव, अर्श और वलीपलित रोगों के लिए अत्युत्तम हैं। यह बल, कान्ति तथा वीर्य-वर्द्धक है और शरीर को स्वस्थ एवं पुष्ट करके पुत्रोत्पादक शक्ति प्रदान…

  • Mutarkrichantak Ras

    Post Views: 19 मूत्रकृच्छान्तक रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक, जवाखार–प्रत्येक समान भाग लें, कज्जली बनाकर सुरक्षित रख लें। मात्रा और अनुपान  (Dose and Anupan)–  2 से 4 रत्ती, मिश्री के साथ दें। ठण्डा जल या दूध की लस्सी ऊपर से पिला दें। गुण और उपयोग…

  • Maha Gandhak Ras

    Post Views: 14 महागंधक रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारा और गन्धक दोनों समान भाग लेकर कञ्जली बना, उसे मन्दाग्नि पर पिघला, पर्पटी बना लें, फिर उसमें जायफल, जावित्री, लौंग, नीम के पत्तों का चूर्ण 1-1 तोला मिलाकर सबको पानी की सहायता से घोंटकर पिण्डाकार टिकिया बना…

  • Kaphkuthar Ras

    Post Views: 37 कफकुठार रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –   शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक, सोंठ, पीपल, कालीमिर्च, लौह भस्म, ताम्रभस्म सब बराबर लेकर, प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बनावे, फिर लौहभस्म और ताम्रभस्म को मिलायें तथा काष्ठौषधियों को कूट-कपड़छन चूर्ण कर कज्जली के साथ मिला छोटी-छोटी कटेली के फलों…